ये हैं सपा के विधायक लेकिन नहीं पता MLA का फुलफॉर्म

नई दिल्ली: जिन्हें जनता अपना कीमती वोट देकर एमएलए बनाती है, उन्हें इसका फुलफॉर्म भी नहीं पता। ये हाल बांदा जिले में चित्रकूट के नेताओं का है। एक नेताजी 5 साल एमएलए रहे, लेकिन जब पूछ लिया गया कि एमएलए का फुलफॉर्म क्या होता है तो विधायक जी इधर-उधर देखने लगे। जब एक विधायक से पूछा गया कि क्या वह देशभक्त हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा-हां। जब उनसे राष्ट्रगान सुनाने को कहा गया तो वे ताकने लगे।
चित्रकूट की सदर विधानसभा सीट से वीर सिंह पटेल सपा के विधायक हैं। उन्हें सपा ने फिर से प्रत्याशी बनाया है। कभी जिला पंचायत रहे 5 साल तक विधायक भी रहने वाले वीर सिंह पटेल एमएलए का फुलफॉर्म नहीं बता पाए। उनसे जब पूछा गया तो वह इधर-उधर देखने लगे। उन्हें ये तो पता था कि कुछ दिन पहले गोवा में चुनाव हुए हैं, लेकिन उन्हें गोवा की राजधानी ही नहीं पता। वीर सिंह 12वीं तक पढ़े हैं।
चित्रकूट की विधानसभा मऊ मानिकपुर में बसपा से वर्तमान विधायक और प्रत्याशी चंद्रभान पटेल भी 5 साल विधायक रहे, लेकिन वह एमएलए का फुलफॉर्म नहीं बता पाए। चंद्रभान पटेल भी 12वीं तक पढ़े हैं। बिग बॉस के घर में रहीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल कांग्रेस की मऊ मानिकपुर सीट से प्रत्याशी हैं। बेसिक सवाल पूछे जाने पर वह जवाब देने की बजाय मीडिया पर ही गुस्सा होती हैं। वह कहती हैं कि हमें कुछ नहीं पता। हम तो दिल से जनता के सेवक हैं। देशभक्त भी दिल से हैं। संपत पढ़ी-लिखी नहीं हैं। वह दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं।

चित्रकूट की कर्वी विधानसभा से बसपा प्रत्याशी जगदीश गौतम का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। राष्ट्रगान सुनाने को कहा गया तो पहले वह टालते रहे, बाद में सुनाना शुरू किया। उन्होंने गलत राष्ट्रगान जिस अंदाज में सुनाया, वह अपमानजनक लगा।
कई मामलों में पिछड़े बुंदेलखंड में लिट्रेसी रेट भी कम है। यहां के जनप्रतिनिधि यानी विधायक, जिन्हें जनता ने चुनकर महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया, उनमें से भी कई इस मामले में पीछे हैं। कोई 8वीं, 10वीं तो कोई 12वीं तक ही पढ़ पाया। 19 विधायकों में से सिर्फ 7 ग्रेजुएट हैं। एक पीएचडी हैं। बाकी 11 विधायक 8वीं, 10वीं, 12वीं तक पढ़ पाए।
सबसे ज्यादा शिक्षित हमीरपुर से विधायक गयादीन अनुरागी हैं। उन्होंने एमए, एलएलबी, बीएड व विद्युत इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। बताते हैं कि जालौन के कालपी की विधायक उमा कांति साक्षर ही नहीं हैं। उन्हें सपा ने फिर से प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने इलेक्शन कमीशन को शिक्षा सम्बन्धी कोई रिकॉर्ड नहीं दिया। वह घर में अभी भी गोबर के उपले बनाती हैं।
पति ही विधायकी चलाते रहे। वहीं, महोबा की चरखारी सीट से सपा विधायक उर्मिला राजपूत द्वारा 12वीं तक शिक्षा बताए जाने पर विवाद हुआ था। विरोधी दलों का कहना था कि वह 12वीं भी नहीं हैं।





