गोरखपुर में तीन दिन में तड़प-तड़प कर मर गए 61 बच्चे, नहीं है किसी को होश

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत का तांडव जारी, कॉलेज प्रशासन लीपापोती करने में जुटा
लखनऊ से लेकर दिल्ली में बैठे माननीयों को नहीं है चिंता, आखिर कब जागेगी सरकार

लखनऊ। गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों के मरने का सिलसिला जारी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही की वजह से पिछले 72 घंटों में 61 बच्चों ने दम तोड़ दिया। आलम यह है कि हर घंटे में एक बच्चे की मौत हो रही है और शासन-प्रशासन मौन साधे हुए है। बच्चों की मौत के साथ-साथ शासन-प्रशासन की संवेदना भी मरती जा रही है। शायद इसीलिए बच्चों को नियति के हवाले छोड़ दिया गया है। 
पिछले तीन दिन में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 61 मासूमों की मौत हुई, जिसमें बीते 24 घंटे में ही 25 बच्चों ने दम तोड़ दिया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि मरने वालों में सिर्फ 11 मरीज इंसेफेलाइटिस के थे। बाकी बच्चों की मौत अन्य बीमारी की वजह से हुई। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से बच्चों में कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। डायरिया, डेंगू, पेट दर्द और बदहजमी के कारण बच्चे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। यहां सवाल उठता है कि पूरे प्रदेश में बारिश हो रही है। मौसमी बीमारियों से सभी दो-चार हो रहे हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों से ऐसी खबरें नहीं आ रही हैं। सिर्फ गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ही ऐसा क्यों हो रहा है? प्रदेश के अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं भगवान भरोसे हैं। दरअसल पूर्वांचल की त्रासदी अब लोगों की आदत में आ चुकी है। इंसेफेलाइटिस नामक महामारी पिछले 40 साल में लाखों बच्चों को निगल चुकी है, लेकिन आज तक इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सका। पूर्वांचल में आज भी इसकी वजह से मासूम दम तोड़ रहे हैं और स्वास्थ्य महकमा लीपापोती करने में जुटा है। 
बीआरडी में ऑक्सीजन त्रासदी के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद अब सरकार इस समस्या की तरफ ध्यान दें। केन्द्र से लेकर राज्य के मंत्रियों के संज्ञान में यह समस्या आ गई थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अस्पताल पहुंचना ही शायद मंत्रियों की जिम्मेदारी थी, तभी तो ऑक्सीजन त्रासदी के बाद भी मासूमों के मरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बीआरडी में सबसे ज्यादा मौतें नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में हुई हैं। इस वार्ड में 119 नवजात भर्ती थे। दो दिनों में एनआईसीयू में 16 नवजातों की मौत हुई। सोमवार को एनआईसीयू में 10 बच्चों की मौत हुई। रविवार को छह नवजातों ने दम तोड़ दिया। इन मौतों पर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ पीके सिंह ने कहा कि बीआरडी अस्पताल में 27 और 28 अगस्त के दौरान 48 घंटे में 42 बच्चों की मौत हुई । इनमें सात बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी बुखार से हुई है। डॉ. पीके सिंह के मुताबिक, इन दिनों अस्पताल में बड़ी संख्या में बीमार बच्चे आ रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में इस वक्त ऑक्सीजन और दवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई बच्चों की सेहत अस्पताल आने तक इतनी बिगड़ चुकी होती है कि डॉक्टर पूरी कोशिश के बावजूद उन्हें बचा नहीं पाते हैं।

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