कॉपरेटिव बैंक को 1000 करोड़ रुपये का नुकसान में अजित पवार के खिलाफ नहीं बंद होगी जांच….

- अजित पवार को 1000 करोड़ के घोटाले में राहत नहीं
- जारी रहेगी आर्थिक अपराध शाखा की जांच
- सुप्रीम कोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार
महाराष्ट्र के वरिष्ठ एनसीपी नेता अजित पवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. करोड़ों रुपये के महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव स्कैम में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही जांच को रद्द करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने पुलिस से कहा है कि इस मामले ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ जांच की जाए.
22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) को एनसीपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और 70 से अधिक लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के मामले में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करने को कहा था.
इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने 26 अगस्त को अजित पवार और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 506, 409, 465 और 467 के तहत मामला दर्ज किया था. इस मामले में पीजेंट एंड वर्कर पार्टी के नेता जयंत पाटिल समेत कई बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है.
क्या है मामला
दरअसल अजित पवार समेत दूसरे नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने कॉपरेटिव बैंक को 1000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया. ये मामले 2007 से 2011 के बीच का है. इस मामले में जब नाबार्ड और एक जांच आयोग ने जांच की तो पाया कि अजित पवार और अन्य आरोपियों के फैसलों और कदमों की वजह से 1000 करोड़ का नुकसान हुआ. नाबार्ड ने अपनी ऑडिट में पाया कि चीनी फैक्ट्रियों और बुनाई मिलों को लोन देने में बैंकिंग नियमों और रिजर्व बैंकों के नियमों और दिशानिर्देशों की अवहेलना की गई. इसकी वजह से कर्जों की वसूली नहीं हो पाई. इस मामले में एक्टिविस्ट सुरिन्दर अरोड़ा ने 2015 में आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत की थी और हाईकोर्ट से मामले की जांच की मांग की थी.





