कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा बढ़ने पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में हाई अलर्ट

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की चपेट में आने से एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद देशभर के अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व में चिंता बढ़ गई है।

आवारा कुत्तों से वन्य जीवों में फैलने वाले इस वायरस को लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने एडवायजरी जारी की है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व राजस्थान के टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है।

हाथी के साथ पेट्रोलिंग शुरू 

मध्य प्रदेश के वन विभाग ने कान्हा टाइगर रिजर्व के बाघ विचरण वाले क्षेत्रों में हाथी के साथ पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। रिजर्व के दो परिक्षेत्रों में 404 कुत्तों का टीकाकरण भी किया जा चुका है।

राज्य के अन्य नेशनल पार्क व टाइगर रिजर्व में भी सावधानी बरती जा रही है। राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व, सरिस्का एवं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में विशेष सावधानी बरती जा रही है।

रणथंभौर एवं आसपास के क्षेत्र से मिट्टी, पानी एवं वन्यजीवों के सैंपल लिए गए

रणथंभौर के जिला वन अधिकारी मानस सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व के पास स्थित करीब 30 गांवों में 350 से अधिक कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा। रणथंभौर एवं आसपास के क्षेत्र से मिट्टी, पानी एवं वन्यजीवों के सैंपल लिए गए हैं।

बता दें कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 77 बाघ हैं।उत्तराखंड में वन्यजीव पालतू कुत्तों व अन्य मवेशियों का आएदिन शिकार कर रहे हैं। ऐसे में यदि किसी गुलदार अथवा बाघ ने सीडीवी संक्रमित कुत्ते का शिकार कर लिया तो वह भी इससे संक्रमित हो सकता है।

इस सबको देखते हुए कार्बेट टाइगर रिजर्व (आरटीआर) व राजाजी टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वन से सटे आबादी वाले क्षेत्रों में पालतू और आवारा कुत्तों के टीकाकरण के लिए कहा गया है।

सीटीआर के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार फील्ड स्टाफ अलर्ट मोड पर है। किसी वन्यजीव की संदिग्ध मौत होने पर पूरे प्रोटोकाल के अनुसार कार्रवाई के लिए कहा गया है।

राज्य में पिछली गणना के अनुसार बाघों की संख्या 560 और गुलदारों की 3,115 आंकी गई थी। कार्बेट में बाघों की संख्या 260 और राजाजी में 55 के आसपास है।

उप्र में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप प्रभागीय अधिकारी रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वनकर्मी बाघों के स्वभाव आदि पर नजर रखते हैं। पर्यटकों को भ्रमण कराने वाले गाइड से भी कहा गया कि बाघों का असामान्य व्यवहार दिखने पर तुरंत सूचित करें। जंगल में लगे कैमरों के जरिये भी निगरानी होती है।

प्रभागीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सभी वन क्षेत्राधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी वन्यजीव के सामान्य व्यवहार में कोई परिवर्तन नजर आए तो उसकी सूचना तत्काल देते हुए उस पर नजर बनाए रखें। इसको लेकर मुख्यालय से भी दिशा-निर्देश मिला है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने जारी की एडवायजरी

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से जारी एडवायजरी में कहा गया है कि नेशनल पार्क के आसपास घूमने वाले कुत्तों का टीकाकरण किया जाए ताकि बाघ, तेंदुआ, चीता जैसे वन्य जीवों में रोग संचरण के जोखिम को कम किया जा सके।

सीडीवी हमेशा बाघों की मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं होता है, यह इम्युनोसप्रेशन (इम्युनिटी में कमी) और गंभीर दुर्बलता का कारण बनता है, इससे विशेष रूप से शावकों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उनकी मृत्यु दर में वृद्धि हो सकती है।

सीडीवी मुख्यतया तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। संक्रमित पशु में तेज बुखार, आंख-नाक से पानी का स्राव, तीव्र खांसी, सुस्ती, पक्षाघात जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इससे संक्रमित जानवर असामान्य व्यवहार करता है।

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