कमर दर्द को न लें हल्के में! डॉक्टर बोले- ये संकेत नजर आएं, तो समझें खतरे में है रीढ़ की हड्डी

क्या आप भी सुबह उठते ही कमर में जकड़न या लंबे समय तक बैठने के बाद पीठ में दर्द महसूस करते हैं? अक्सर हम इसे दिनभर की थकान या गलत तरीके से बैठने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis) नाम की एक गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है?

यह एक लंबे समय तक चलने वाली सूजन वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से हमारी रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर असर डालती है। भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस बीमारी का पता बहुत देर से चलता है, जिससे यह गंभीर रूप ले लेती है। आइए जानते हैं कि आखिर इसके डायग्नोसिस में इतनी देरी क्यों होती है।

बीमारी की पहचान में देरी की 5 बड़ी वजहें
इसे सामान्य कमर दर्द समझ लेना
भारत में इस बीमारी के देर से पकड़े जाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। लोग इसे मांसपेशियों का दर्द समझकर लंबे समय तक डॉक्टर के पास जाना टालते रहते हैं।

आकाश हेल्थकेयर के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, “इसके शुरुआती लक्षण बहुत आम होते हैं- जैसे सुबह कमर में जकड़न होना। लोग इसे साधारण बैक पेन समझ लेते हैं, जिससे सही समय पर बीमारी पकड़ में नहीं आती।”

सही विशेषज्ञों तक पहुंचने में कमी
भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रूमेटोलॉजिस्ट की संख्या काफी कम है। मरीज अक्सर सबसे पहले किसी जनरल फिजिशियन या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के पास जाते हैं। सही विशेषज्ञ तक पहुंचते-पहुंचते काफी समय बीत जाता है और तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

जांच की जानकारी न होना और एडवांस टेस्ट की कमी
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की सही पहचान के लिए एमआरआई और एचएलए-बी27 जैसे टेस्ट की जरूरत होती है। शुरुआती एक्स-रे में इस बीमारी के संकेत अक्सर दिखाई नहीं देते। जागरूकता की कमी और इन टेस्ट्स के महंगे होने की वजह से लोग समय पर सही जांच नहीं करा पाते हैं।

महिलाओं में बीमारी को समझने में चूक
महिलाओं में इस बीमारी का पता और भी ज्यादा देरी से चलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों की तुलना में थोड़े अलग या हल्के होते हैं। अक्सर इनके दर्द को सामान्य दर्द या ‘हार्मोनल बदलाव’ से जोड़कर देख लिया जाता है, जिससे सही बीमारी छिप जाती है।

सामाजिक और आर्थिक बाधाएं
महंगे इलाज और जांच के डर से भी कई लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। इसके अलावा, अपने काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझे लोग अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं देते और दर्द सहते रहते हैं।

देरी होने पर क्या हो सकते हैं खतरे?
अगर सही समय पर इस बीमारी का पता न चले, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं:

रीढ़ की हड्डी में स्थायी जकड़न: आपकी रीढ़ की हड्डी हमेशा के लिए सख्त हो सकती है, जिससे शरीर को मोड़ने या हिलने-डुलने में भारी परेशानी होती है।
अन्य अंगों पर असर: यह बीमारी केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह आपकी आंखों, दिल और फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि अगर सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रण में रखा जा सकता है, लेकिन जितनी देरी होगी, शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा।

आपके लिए क्या है सलाह?
भारत में जागरूकता की कमी, सही जांच में देरी और आर्थिक कारणों से यह बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आती। इसलिए, अगर आपको या आपके किसी परिचित को लगातार कमर में दर्द रहता है या सुबह उठने पर पीठ में जकड़न महसूस होती है, तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। दर्द निवारक गोलियों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत एक सही विशेषज्ञ से सलाह लें। आपकी एक छोटी-सी सतर्कता आपको भविष्य के बड़े खतरे से बचा सकती है।

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