इस ‘पीके’ के चक्कर में फंस गए उत्तराखंड के अफसर, कैसे आइए जानिए


ये भी पढ़े: शराब खरीदने पर रसीद क्यों नहीं मिलती?, आपके होश उड़ा देगी इसकी वजह
इसमें टीम पीके को कथित तौर पर तत्कालीन आबकारी सचिव व परिवहन आयुक्त की तरफ से वाहन उपलब्ध कराना, उसकी चेकिंग न करने का आदेश देना आदि बात कही गई। आरोप था कि इसके लिए परिवहन मुख्यालय से बाकायदा एक ई-मेल तक अफसरों को भेजी गई। इस मामले में शुरुआती जांच भी हुई थी। बताया जाता है कि इसमें कुछ परिवहन कार्यालयों से ई-मेल प्राप्त होने की बात स्वीकारी गई थी, लेकिन मौखिक निर्देश से इनकार किया गया था।
इसमें याचिकाकर्ता को शिकायतों के संबंध में प्रार्थना पत्र देने कहा था। याचिकाकर्ता अरविंद कुमार का कहना है कि चुनाव में आचार संहिता का उल्लंघन किया गया था, इसमें अफसरों की भूमिका संदिग्ध थी, इसे लेकर 15 मई को हाईकोर्ट के संशोधित आदेश के बाद एक प्रार्थनापत्र केंद्रीय निर्वाचन आयोग को दो जून को रिसीव करा दिया है। प्रार्थनापत्र के साथ हाईकोर्ट के संशोधित आदेश की कापी भी रिसीव कराई गई है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग से मामले की जांच करने अनुरोध किया गया है।
इस मामले में एसएसपी नैनीताल जन्मेजय खंडूरी का कहना कि विधानसभा चुनाव में पुलिस ने पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चुनाव कराने में सहयोग किया है। किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई है। चुनाव के समय पर्यवेक्षक भी तैनात थे और आचार संहिता का पूरा पालन किया गया।
रामनगर के कोतवाल विक्रम सिंह राठौर का कहना है कि रामनगर में ही शराब का एक बड़ा जखीरा पुलिस ने पकड़ा था। पुलिस ने प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की। इस मामले में तत्कालीन आबकारी सचिव व परिवहन आयुक्त सीएस नपलच्याल से कई बार संपर्क कर पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार संपर्क करने पर भी उनका पक्ष नहीं मिल पाया। जब भी उनका पक्ष सामने आएगा प्रकाशित किया जाएगा।





