इस काम के लिए भी अनिवार्य हुआ आधार, बचेंगी कई जिंदगियां

बेंगलुरू। कर्नाटक में अब अंगदान के लिए भी आधार अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बायोमेट्रिक डेटा मैचिंग में लाभ मिलेगा और जरूरतमंदों को अंग प्रत्यर्पण के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव शालिनी रजनीश ने बताया, यह व्यवस्था लागू होने के बाद डॉक्टरों को ब्रेनडेडे मरीज की केवल थम्बप्रिंट लेना होगी और पूरी ऑनलाइन जानकारी उनके सामने आ जाएगी और वे तत्काल अंगदान की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
एक और फायदा यह भी
अंगदान के मामले में डॉक्टरों को इस परेशानी का भी सामना करना होता है कि परिजन के निधन के बाद पीड़ित परिवार इस पर फैसला लेने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होता। ऐसे में यदि कोई जीवित रहते अंगदान का फैसला करता है और रजिस्ट्रेशन कराते समय आधार कार्ड का इस्तेमाल करता है तो भी डॉक्टरों के लिए सुविधाजनक रहेगा।
कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जहां व्यक्ति ने अंगदान के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन परिवार को जानकारी ही नहीं होती। तब डॉक्टरों या सरकारी अधिकारियों को परिवार को यह समझाने में कीमती समय खर्च करना पड़ता है। आधार से लिंक होने पर इससे भी राहत मिलेगी।
यहां आधार के कारण सामने आए 3.5 लाख फर्जी छात्र
आधार से कैस-कैसे फायदे हो सकते हैं, इसका उदाहरण आंध्रप्रदेश में सामने आया है। वहां जब आंकड़ों की छंटाई शुरू हुई तो पता चला है कि 3 लाख से ज्यादा ‘फर्जी’ बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों ने इस बड़े आंकड़े के आधार पर कैसे-कैसे फायदा उठाए होंगे।
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दरअसल, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की आधार से लिंकिंग जरूरी कर दिया है। सभी राज्यों को इस संबंधी निर्देश दिए गए हैं। आंध्र में इस रिकॉर्ड को खंगाला गया तो पता चला कि कई फर्जी नाम भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। कुछ बच्चों के नाम दो-दो बार लिखे गए हैं।





