आपके नन्हे प्यारे को कहीं लग ना जाए ठण्ड की नजर, करें कुछ इस तरह CARE

सर्दियों में जन्मे बच्चों को शुरुआती दौर में ज्यादा केयर की जरूरत होती है. लिहाजा, अगर आप नई-नई मां बनी हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि अपने बच्चे को सर्दी से बचाने के लिए क्या करें और क्या ना करें.

आपके नन्हे प्यारे को कहीं लग ना जाए ठण्ड की नजर, करें कुछ इस तरह CARE

आमतौर पर लोग बच्चों को ठंढ से बचाने के लिए खूब सारे कपड़े लाद देते हैं, जिससे नवजात बच्चा पूरे वक्त uncomfortable महसूस करता है. ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि ठंढ है, पर बच्चे को इतना भी न ढक दें कि उसकी त्वचा सांस न ले पाए.  कुछ लोग सर्दी से बचाने के लिए दिनभर घर में ब्लोअर या हीटर चलाकर रखते हैं. इस तरह के उपाय भी नवजात बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.

मल्ल‍िक रेडिक्स के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अमित कुमार ने बताया कि ये सभी तरीके बहुत गलत हैं. ये बात ठीक है कि बच्चों को ठंढ से बचाना जरूरी है, पर बचाव का ये तरीका उन्हें दूसरी परेशानियों में डाल सकता है. डॉ. अमित के मुताबिक नवजात बच्चों को ठंढ से बचाने के लिए इन बातों का ख्याल रखना चाहिए…

नवजात बच्चों को नहलाते वक्त इस बात का ध्यान रहे कि गर्दन के ऊपर पानी न जाने पाए. बच्चे को गर्दन के नीचे से ही नहलाएं. 
चेहरे, सिर और गर्दर को गीले कपड़े से पोछ सकते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि नाक, कान और मुंह से पानी अंदर जा सकता है, जिससे कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं.

सर्दी से बचने के लिए ब्लोवर या हीटर का इस्तेमाल न करें. इससे निकलने वाली ड्राई एयर बच्चे को नुकसान पहुंचाती है. इसकी जगह आप ऑयर हीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. ठंढ से बच्चों को बचाने के लिए बहुत ज्यादा कपड़े लादने की बजाय, उसका तलवा, उसकी हथेली और उसके कान व सिर ढक कर रखें. ये ऐसे एरियाज हैं, जहां से सबसे ज्यादा हीट लॉस होता है और यहीं से सबसे ज्यादा ठंढ लगने का डर सबसे ज्यादा होता है. इसलिए बच्चों के टोपी, दस्ताने और मोजे जरूर पहनाकर रखें. 

सर्दियों में धूप बहुत जरूरी है इसलिए रोजाना सुबह बच्चे को सन बाथ जरूर कराएं. इससे उनकी हड्डियों के विकास में मदद मिलेगी.एक से डेढ महीने तक बच्चे को किसी आउटसाइडर यानी कि घर में बाहर से आने वाले लोगों के संपर्क में न जाने दें. खासतौर से अगर वह व्यक्त‍ि इंफेक्टेड है तो उसकी गोद में बच्चे को न दें.  बच्चों का इम्यून इतना स्ट्रॉन्ग नहीं होता. वह अभी बनने के दौर में होता है, इसलिए उन्हें इंफेक्शन से दूर रखने की जरूरत होती है.

एक से डेढ महीने तक बच्चे को कहीं बाहर न ले जाएं. कहीं बाहर से मतलब है, उसे कहीं आउट स्टेशन या पब्ल‍िक प्लेस या भीड़-भाड़ वाली जगह पर न ले जाएं. इससे भी बच्चे को इंफेक्शन का डर होता है. बच्चे के विकास के लिए मां का दूध सबसे जरूरी होता है. छह महीने तक मां का दूध पीने वाले बच्चे का इम्यून सिस्टम ऐसे बच्चों से ज्यादा मजबूत होता है, जो बाहर का दूध पीते हैं. 

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