अल्टीमेट ग्लो के लिए बेस्ट है Niacinamide

क्या आप भी बेदाग, दमकती और हेल्दी स्किन पाने के लिए ढेरों स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके थक चुके हैं? सोचिए, अगर आपकी कई स्किन प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन सिर्फ एक ही ‘इंग्रेडिएंट’ में छिपा हो तो? जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘नियासिनमाइड’ की।
हमारी स्किनकेयर सीरीज (Skincare Decoded) के इस पहले भाग में, हम कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, डॉ. जैस्मीन कौर कोहली के जरिए आपके लिए इस ‘सुपरस्टार’ एक्टिव से जुड़ी हर जरूरी डिटेल लेकर आए हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह इंग्रीडिएंट इतना खास क्यों है और आपकी त्वचा के लिए कैसे काम करता है।
सवाल 1: नियासिनमाइड आखिर स्किन के लिए करता क्या है?
जवाब: नियासिनमाइड असल में विटामिन B3 का ही एक टाइप है। यह स्किन बैरियर को रिपेयर करता है, जिससे त्वचा की नमी बनी रहती है। यह ऑयल के प्रोडक्शन को भी कंट्रोल करता है, जो एक्ने-प्रोन स्किन के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा, यह पोर्स को छोटा दिखाता है, दाग-धब्बों को हल्का करता है, सूजन कम करता है और स्किन को अंदर से हेल्दी बनाता है।
सवाल 2: क्या नियासिनमाइड और विटामिन C का इस्तेमाल एक साथ कर सकते हैं?
जवाब: हां, आप इन दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि ये अक्सर एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छे से काम करते हैं। नियासिनमाइड स्किन बैरियर को फिक्स करने और ऑयल को कंट्रोल करने का काम करता है, जबकि विटामिन C त्वचा को चमकदार बनाता है। हालांकि, अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है, तो इनका यूज धीरे-धीरे शुरू करें और कोई भी रिएक्शन चेक करने के लिए पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।
सवाल 3: क्या नियासिनमाइड से ‘पर्जिंग’ की समस्या होती है?
जवाब: नहीं, आमतौर पर नियासिनमाइड से त्वचा पर ‘पर्जिंग’ या ब्रेकआउट्स नहीं होते हैं। यह एक बहुत ही माइल्ड इंग्रीडिएंट है जो सूजन को कम करता है और ऑयल को कंट्रोल करता है। अगर आपको इसे लगाने के बाद एक्ने हो रहे हैं, तो यह आपकी स्किन की सेंसिटिविटी, बहुत ज्यादा मात्रा या इसे किसी अन्य प्रोडक्ट के साथ गलत तरीके से मिलाने की वजह से हो सकता है।
सवाल 4: क्या 10% नियासिनमाइड 5% से ज्यादा बेहतर है?
जवाब: हमेशा नहीं। 2% से 5% जैसी कम मात्रा वाला नियासिनमाइड भी ऑयल कंट्रोल करने और स्किन को बेहतर बनाने के लिए काफी होता है। बहुत से लोग 10% फॉर्मूला पसंद करते हैं, लेकिन स्ट्रॉन्ग फॉर्मूला हमेशा बेहतर काम नहीं करता। कई बार यह त्वचा को और ज्यादा सेंसिटिव बना सकता है। सबसे अच्छा तरीका है कि कम मात्रा से शुरुआत करें और जरूरत पड़ने पर ही इसे बढ़ाएं।
सवाल 5: क्या नियासिनमाइड सच में पोर्स को छोटा कर सकता है?
जवाब: नियासिनमाइड असल में पोर्स को “सिकोड़ता” नहीं है, क्योंकि पोर्स का आकार हमारे जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। हालांकि, यह समय के साथ उन्हें छोटा जरूर दिखाता है। यह ऑयल को कंट्रोल करके पोर्स को ब्लॉक होने से रोकता है, जिससे त्वचा स्मूद हो जाती है और पोर्स कम दिखाई देने लगते हैं।
सवाल 6: नियासिनमाइड का असर दिखने में कितना समय लगता है?
जवाब: इसका असर रातों-रात नहीं दिखता, लेकिन नियमित इस्तेमाल से आपको जल्दी बदलाव नजर आ सकता है। 2 से 4 हफ्तों के भीतर आपको ऑयल कंट्रोल और स्किन पर एक अलग ही ग्लो दिखने लगेगा। वहीं, स्किन टेक्सचर, दाग-धब्बों और पोर्स में साफ अंतर देखने के लिए आपको लगभग 6 से 8 हफ्तों तक इसका इस्तेमाल करना होगा।
सवाल 7: नियासिनमाइड सुबह लगाना चाहिए या रात में?
जवाब: नियासिनमाइड बहुत ही फ्लेक्सिबल है, इसलिए आप इसे सुबह और रात दोनों समय लगा सकते हैं। सुबह यह ऑयल कंट्रोल करके आपकी सनस्क्रीन के लिए एक अच्छा बेस तैयार करता है। रात में यह स्किन के टेक्सचर और रंगत को सुधारने और रिपेयर करने का काम करता है। अगर आप बिगेनर हैं, तो दिन में एक बार से शुरुआत करें।
सवाल 8: क्या यह एक्ने मार्क्स और डार्क स्पॉट्स को कम करता है?
जवाब: हां, अगर आप इसका लगातार इस्तेमाल करते हैं, तो नियासिनमाइड एक्ने मार्क्स और डार्क स्पॉट्स को कम करने में मदद करता है। यह त्वचा में पिगमेंट की गति को धीमा करता है, जिससे दाग धीरे-धीरे हल्के हो जाते हैं और स्किन टोन एकसमान हो जाती है। इसके साथ ही, यह सूजन कम करके नए दाग बनने से भी रोकता है।
सवाल 9: क्या रेटिनॉल के साथ नियासिनमाइड का यूज कर सकते हैं?
जवाब: हां, रेटिनॉल और नियासिनमाइड का एक साथ यूज करने में कोई नुकसान नहीं है, बल्कि ये दोनों एक बेहतरीन कॉम्बो हैं। रेटिनॉल एंटी-एजिंग पर काम करता है, जबकि नियासिनमाइड स्किन बैरियर को रिपेयर करके जलन को कम करता है। अगर आप रेटिनॉल नया-नया लगा रहे हैं, तो ड्राईनेस से बचने के लिए पहले नियासिनमाइड लगाएं।
सवाल 10: क्या नियासिनमाइड सेंसिटिव स्किन या रोजेशिया के लिए सेफ है?
जवाब: नियासिनमाइड सेंसिटिव स्किन के लिए आमतौर पर बहुत अच्छा होता है क्योंकि यह त्वचा को शांत करता है। यह ‘रोजेशिया’ जैसी स्थिति में भी मदद कर सकता है, जिसमें चेहरे पर रेडनेस, जलन और सूजन आ जाती है। फिर भी, हर किसी का स्किन टाइप अलग होता है, इसलिए हमेशा कम मात्रा से शुरुआत करें और पहले पैच टेस्ट जरूर करें।





