अनशन तुड़वाने अफसरों के साथ पहुंचे भय्यू महाराज, मेधा का इनकार

-
चिखल्दा गांव/बड़वानी/ इंदौर.दोपहर के 1:30 बजे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख मेधा पाटकर के उपवास का 10वां दिन। लड़ेंगे-जीतेंगे के नारे गूंज रहे हैं। निमाड़ी में बज रहे गीत ‘जागो जागो निमाड़ की जनता’ जैसे गीत डूब प्रभावितों में जोश भर रहे हैं। शनिवार को यहां रोज से 10 गुना ज्यादा यानी तकरीबन 4000 से ज्यादा लोग हैं। दोपहर दो बजे संत भय्यु महाराज के साथ मुख्यमंत्री के सचिव बी.चंद्रशेखर, इंदौर कमिश्नर संजय दुबे और एडीजी अजय शर्मा का प्रतिनिधिमंडल उपवास स्थल पर पहुंचा।
भय्यु महाराज मेधा से बातचीत में मध्यस्थता करने आए हैं। सवाल-जवाब का दौर तकरीबन 4 घंटे तक चला। पर बात नहीं बनी। मेधा ने साफ कहा- हमारे धरने को मुख्यमंत्री ने प्रतिष्ठा का मुद्दा बना रखा है। बांध में पानी भरना मोदीजी की राजनीतिक जरूरत है।ये भी पढ़े: इस मुस्लिम नेता ने PM मोदी की जमकर तारीफ, कहा- नरेंद्र मोदी अल्लाह का अवतार हैं
वे कानूनन हक नहीं देते। घोषणा करते हैं। राज्य की तिजोरी खाली हुई है! गांव खाली नहीं हुए हैं और न खाली होंगे। बड़वानी कलेक्टर बुलडोजर से लोगों को हटाते हैं। एनवीडीए के अधिकारी सामने क्यों नही आ रहे। प्रभावितों को मिलने वाली 60 लाख राशि में से 15 से 20 लाख दलाल मांग रहे हैं। अफसरों ने प्रभावितों के साथ संवेदना तो जताई लेकिन बांध में पानी न भरने व पुनर्वास के बाद हटाने संबंधी निर्णय सीएम पर छोड़ दिया। इस पर मेधा ने अपवास तोड़ने से इनकार कर दिया।
मेधा ने अफसरों से कहा…घाटी का ताम्र युग खत्म हो रहा है। हम कानूनी दायरे से ज्यादा मांगें तो आप मना कर सकते हैं। अस्थायी नहीं स्थायी पुनर्वास ही देना होगा। मर जाएंगे लेकिन गांव नहीं छोड़ेंगे। गुजरात को पानी की जरूरत अभी नहीं। फिर डैम भरने की जल्दी क्यों?कमिश्नर बोले- आप तो मानेंगीं नहीं: मेधा ने प्रतिनिधिमंडल को सवालों से घेरा तो कमिश्नर दुबे बोले-मैं गंभीरता से भी कहूंगा तो आप तो मानेंगी नहीं। जवाब मांगती हैं और बोलने भी नहीं दे रहे। यहां हुई हर बात नोट की गई है। यह बात निर्णय तक पहुंचने में मददगार होगी।– मैं सोचता हूं ग्रामीणों के साथ समन्वय बनाने से उचित रास्ता निकल सकता है। स्थानीय स्तर पर समितियां अफसरों के साथ मिलकर काम करेंगी तो निदान पा सकते हैं। -भय्यु महाराज





