YouTube वीडियो देखकर इस लड़की की अपनी ऐसी हालत, सब हुए हैरान

आजकल हमने गूगल को ही अपना गुरु मान लिया है। कई लोगों ने गूगल को डॉक्टर और ना जाने क्या-क्या मान लिया है, लेकिन यदि आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने गूगल को डॉक्टर माना है तो आप बहुत बड़े खतरे से गुजर रहे हैं। यह बात हम आपसे इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि गूगल पर दवाई खोजना या तो आपकी जान ले सकता है या फिर आपको इतना बीमार बना सकता है कि आप इलाज के काबिल नहीं रह जाएंगे। आज हम आपको दो ऐसी ही स्टोरी बताने वाले हैं कि आप भी चौंक जाएंगे।
दरअसल मामला यह है कि एक 26 साल की लड़की की जान “गूगल डॉक्टर” के कारण ही चली गई है। यह मामला यूपी के गोरखपुर का है जहां 26 साल की एक अविवाहित लड़की ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर खुद ही डिलिवरी करने की कोशिश की और इसी कोशिश में बच्चे के साथ उसकी भी जान चली गई।
इस घटना जानकारी लोगों को तब मिली जब कमरे से खून बहकर बाहर आया। रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर के बिलंदपुर इलाके में एक लड़की किराए के मकान में रहती थी और वह प्रेगनेंट थी, लेकिन लोकलाज की डर से बिना किसी अस्पताल में गए खुद ही डिलिवरी करने लगी।
कमरे से स्मार्टफोन बरामद हुआ है जिससे पता चला कि वह यूट्यूब पर घर पर खुद ही डिलिवरी कैसे करें, जैसे वीडियो देख रही थी। कमरे से फोन के साथ कैची, ब्लेड और धागे भी बरामद किए गए हैं। लड़की ने 4 दिन पहले ही कमरे को किराए पर लिया था और मालिक को बताया था कि उसकी मां डिलिवरी के लिए यहां आने वाली हैं। अगली स्लाइड में जानें दूसरी दिल्ली के एक लड़के की कहानी।
कुछ दिन पहले ही ऐसी ही एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक दिल्ली में रहने वाला अमित नाम का एक लड़का किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर गूगल पर इलाज खोजने लगता था। उस लड़के ने शुरुआत में सिर दर्द को लेकर इंटरनेट पर कई दवाईयां सर्च की और उनका सेवन भी किया, लेकिन उसकी बीमारी ठीक होने के बजाय दिनों-दिन बढ़ती गई। बाद में अस्पताल में टेस्ट कराने पर पता चला कि उसे वह फालतू का ही परेशान हो रहा था और सिरदर्द से ज्यादा परेशान बीमारी को लेकर था।
इस बारे में मैक्स अस्पताल में मेडिकल एडवाइजर और डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. राजीव डैंग कहते हैं, ”हर दूसरा मरीज नेट और गूगल से कुछ न कुछ पढ़कर आता है, उसके मुताबिक सोच बनाता है और फिर बेबुनियाद सवाल करता है। मरीज अपनी इंटरनेट रिसर्च के अनुसार जिद करके टेस्ट भी कराते हैं और छोटी-मोटी दवाइयां ले लेते हैं।” ‘कई लोग सीधे आकर कहते हैं कि हमें कैंसर हो गया है। डॉक्टर खुद कैंसर शब्द का इस्तेमाल तब तक नहीं करते जब तक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाते कि ये कैंसर है क्योंकि इससे मरीज को घबराहट हो सकती है।’ दिल्ली वाले अमित की स्टोरी हमारे पार्टनर बीबीसी से ली गई है।





