आपकी बॉडी लैंग्वेज दर्शाती है इतनी बातें, ऐसे खड़े रहने वाले होते हैं कॉन्फिडेंट

अमूमन हम सब ही अपने गैंग के साथ रेस्त्रां जाते हैं। दोस्त हैं जाहिर सी बात है कि मस्ती-मजाक तो चलता ही है। ग्रुप में सबसे शांत लड़के को कहा जाता है, “भाई, वेटर को बुला”। अब वो भाईसाहब यहाँ भी सही खेल जाते हैं। न तो वो ‘excuse me’ कहते हैं और न मुंह से कोई आवाज निकालते हैं। वेटर को बिना कुछ कहे निगाहभर देखते हैं और वो अलादीन के जिन्न की तरह ‘क्या हुकुम मेरे आका’ करते हुए हाजिर हो जाता है। 

आपकी बॉडी लैंग्वेज दर्शाती है इतनी बातें, ऐसे खड़े रहने वाले होते हैं कॉन्फिडेंट

आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों? बिना कुछ कहे सामने वाला कैसे समझ जाता है कि आप क्या कहना चाह रहे हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि 60 से 65 प्रतिशत communication नॉन वर्बल ही होता है। मतलब सामने वाला आपकी बॉडी लैंग्वेज से ही बहुत कुछ जान जाता है या यूँ कह लीजिए कि बॉडी लैंग्वेज भी बातचीत का एक जरिया है। बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको बॉडी लैंग्वेज के बहुत ही मजेदार फैक्ट्स बताने वाले हैं। आइये जानते हैं।

नॉर्मल व्यक्ति 6-8 बार

औसतन हर व्यक्ति एक मिनट में 6-8 बार पलकें झपकता है। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति नर्वस है तो आप उसकी बॉडी लैंग्वेज देखकर ही समझ सकते हैं। यहाँ तक कि नर्वस होने की स्थिति में व्यक्ति नार्मल से कई ज्यादा बार पलकें झपकाता है।

बैठने का तरीका 

आपके बैठने की पोजीशन भी आपकी बॉडी लैंग्वेज के अन्दर आती है। इस तस्वीर में दिखाई गई पोजीशन को ‘Crotch Display’ कहा जाता है।

ऐसे लोग होते हैं डॉमिनेटिंग

 इस तरह से बैठने वाले पुरुष आमतौर पर डॉमिनेटिंग स्वभाव के होते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज से पता चल जाता है कि दूसरे व्यक्ति की बात को कम और अपनी बात को ज्यादा महत्व देते हैं

पास मत आना  

इंसान का अपना एक पर्सनल स्पेस होता है। यदि आप उस पर्सनल स्पेस से ज्यादा करीब जाते हैं तो व्यक्ति कि बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है।

इमोशनल कनेक्शन न होना

यदि कोई व्यक्ति बात करते समय अपने दोनों हाथ और दोनों पैर क्रॉस करके बैठता है तो इसका मतलब है कि वो इमोशनली उस बातचीत का हिस्सा नहीं है।

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हंसी तो फंसी 

हंसी भी एक तरह से बॉडी लैंग्वेज के अंतर्गत ही आती है। जब कोई व्यक्ति सामने वाले की बातों से सहमत होता है तो वो बिना कुछ कहे ‘हंसी’ के जरिए अपनी रजामंदी दर्शा देता है।

झूठ या असहमति 

बात करते समय ‘eye contact’ न बनाना दर्शाता है कि या तो सामने वाला व्यक्ति आपसे झूठ बोल रहा है या वो आपकी बात से सहमत नहीं है। 

औसतन हर व्यक्ति एक मिनट में 6-8 बार पलकें झपकता है। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति नर्वस है तो आप उसकी बॉडी लैंग्वेज देखकर ही समझ सकते हैं। यहाँ तक कि नर्वस होने की स्थिति में व्यक्ति नार्मल से कई ज्यादा बार पलकें झपकाता है।

बैठने का तरीका 

आपके बैठने की पोजीशन भी आपकी बॉडी लैंग्वेज के अन्दर आती है। इस तस्वीर में दिखाई गई पोजीशन को ‘Crotch Display’ कहा जाता है।

ऐसे लोग होते हैं डॉमिनेटिं

इस तरह से बैठने वाले पुरुष आमतौर पर डॉमिनेटिंग स्वभाव के होते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज से पता चल जाता है कि दूसरे व्यक्ति की बात को कम और अपनी बात को ज्यादा महत्व देते हैं

पास मत आना  

इंसान का अपना एक पर्सनल स्पेस होता है। यदि आप उस पर्सनल स्पेस से ज्यादा करीब जाते हैं तो व्यक्ति कि बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है।

इमोशनल कनेक्शन न होना

यदि कोई व्यक्ति बात करते समय अपने दोनों हाथ और दोनों पैर क्रॉस करके बैठता है तो इसका मतलब है कि वो इमोशनली उस बातचीत का हिस्सा नहीं है।

हंसी तो फंसी 

हंसी भी एक तरह से बॉडी लैंग्वेज के अंतर्गत ही आती है। जब कोई व्यक्ति सामने वाले की बातों से सहमत होता है तो वो बिना कुछ कहे ‘हंसी’ के जरिए अपनी रजामंदी दर्शा देता है।

झूठ या असहमति 

बात करते समय ‘eye contact’ न बनाना दर्शाता है कि या तो सामने वाला व्यक्ति आपसे झूठ बोल रहा है या वो आपकी बात से सहमत नहीं है। 

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