आदिवासियों की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिन्हे जानकर आप हो जाओगे हैरान…

आज हम आपको अमेजान के वर्षा वनों के किनारे बसने वाले आदिवासियों से जुड़े हुए रोचक तथ्यों के बारे में बताते हैं। आदिवासियों का रहन-सहन, खानपान, रीतिरिवाज और जीवन सबकुछ आज के जीवन से हटकर होता है। जो आप पहले नहीं जानते होंगे। यह आदिवासी समाज अपने प्रथाओं, अविश्वसनीय कार्यो तथा रहन-सहन के तरीके के लिए जाने जाते हैं। इन्हें यानोमामी आदिवासी भी कहा जाता है।

इस समाज के लोग नग्न घूमते हैं और खुले टेंट में छत के नीचे रहते हैं। ये लोग अपने परिजनों की आत्मा को बचाने के लिए अपनी ही जाति के मृत लोगों की राख खाने में विश्वास रखते हैं। मेजान के वर्षा वन क्षेत्र में इस जनजाति के लोग लगभग 200-250 गांवों में फैले हुए है। इनमें मानयता है कि कोई अगर प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त हो तो ये लोग उस व्यक्ति की राख से बना सूप पीते हैं। जरूरी नहीं कि मृत व्यक्ति उनका कोई रिश्तेदार या सगा संबंधी हो।

इन लोगों विश्वास है कि यह जनजाति मृत्यु में विश्वास नहीं रखती। बल्कि इन लोगों का मानना है कि विरोधी जनजाति के किसी जादूगर ने उनकी प्रजाति के किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए बुरी आत्मा भेज दी है। जिसके उपाय के तौर पर ये लोग सोचते हैं कि उस व्यक्ति के शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया जाए। राख खाने के पीछे इन लोगों का मानना है कि मृत व्यक्ति की राख खाने से उनकी जाति के प्रिय सदस्य की आत्मा जीवित रहती है तथा इससे आने वाली पीढिय़ों का भाग्य अच्छा होता है।

राख का सूप बनाने के लिए मृत व्यक्ति के शरीर को पास के जंगल में पत्तों से ढककर रख दिया जाता है। 30 से 45 दिनों के बाद वे विघटित शरीर से हड्डियां एकत्रित करते हैं और उन्हें जलाते हैं। हड्डियों के जलने से जो राख मिलती है उसे केले के साथ मिलाकर सूप बनाया जाता है। पूरी जनजाति यह सूप पीती है! पूरी जनजाति को यह मिश्रण पीना जरूरी होता है। इसके लिए जनजाति के सदस्यों के बीच सूप पास किया जाता है। इसे एक बार में ही पीना जरूरी होता है।

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