पूजा में इन 3 तरह के बर्तनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है भारी
हिंदू परिवारों में मंदिर का अहम स्थान होता है। माना जाता है कि सुबह उठकर भगवान की पूजा करने से जीवन की बड़ी-बड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं। पर क्या आप जानते हैं आपकी हर इच्छा पूरी करने के पीछे आपके मंदिर में रखे बर्तनों का भी बहुत बड़ा हाथ होता है। ऐसे में आइए जानते हैं मंदिर में कौन से ऐसे बर्तन होते हैं जिन्हें मंदिर में रखना शुभ नहीं अशुभ होता है।
लोग अपने मंदिर में पूजा की चीजों को रखने के लिए अलग-अलग धातु से बने बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। हमारे धर्म में ये बर्तन किस धातु के होने चाहिए और किस धातु के नहीं, इस संबंध में कई नियम बताए गए हैं। ऐसे में जब आप उन धातुओं का पूजा में इस्तेमाल करते हैं जिन्हें वर्जित माना गया है तो धर्म- कर्म का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
पूजा के कई नियम बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग धातु अलग-अलग फल देती है। ऐसा नहीं है कि इसके पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही हैं बल्कि कई वैज्ञानिक कारण भी इस तर्क को मानते हैं। बता दें, मंदिर में पूजा करने के लिए सोना, चांदी, पीतल और तांबे की बर्तनों का उपयोग शुभ माना गया है। वहीं दूसरी ओर पूजन में लोहा और एल्युमीनियम धातु से निर्मित बर्तन वर्जित किए गए हैं।
धार्मिक क्रियाओं को करते समय लोहा, स्टील और एल्युमीनियम का उपयोग इसलिए वर्जित माना गया है क्योंकि पूजा के लिए यह धातु अपवित्र मानी जाती है। इतना ही नहीं इन धातुओं की मूर्तियां भी नहीं बनाई जाती। लोहे में हवा, पानी से जंग लग जाता है। एल्युमीनियम से भी कालिख निकलती है। पूजन में कई बार मूर्तियों को हाथों से स्नान कराया जाता है, उस समय इन मूर्तियों को रगड़ा भी जाता है। ऐसे में लोहे और एल्युमीनियम से निकलने वाली जंग और कालिख का हमारी त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए लोहा, एल्युमीनियम को पूजा में निषेध माना गया है।
पूजा करने के लिए हमेशा मंदिर में सोने, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। इन धातुओं को रगड़ना हमारी त्वचा के लिए लाभदायक रहता है। इसके अलावा इन धातुओं को मंदिर में रखने और इनसे पूजा करने के लिए भी शुभ माना जाता है।





