चीन के AI मॉडल ‘Z.AI’ ने वैश्विक बाजार में दी दस्तक

बीजिंग की स्टार्टअप कंपनी ज़ेड.एआई (Z.AI) ने अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ‘GLM-5.2’ पेश किया है, जिसने वैश्विक एआई रेस को और तेज कर दिया है। इस मॉडल की तुलना सीधे तौर पर ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसे दुनिया के टॉप एआई सिस्टम से की जा रही है, खास तौर से कोडिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और स्वायत्त एआई एजेंटों के मामले में।
फ्रंटियर मॉडल्स के इतर, यह एक ओपन-वेट मॉडल है, जिसे डेवलपर्स आसानी से डाउनलोड और कस्टमाइज़ कर सकते हैं। इसके साथ ही, इसे चलाने की लागत भी काफी कम है। चीनी एआई की इस बड़ी छलांग से वैश्विक बाजार में हलचल पैदा हो गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इससे घबराने के बजाय अपनी तैयारियों को मजबूत करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
चीन की सबसे चर्चित AI कंपनी
साल 2019 में बीजिंग की त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों द्वारा बनाई गई Z.AI आज चीन की सबसे चर्चित एआई कंपनियों में से एक बन चुकी है। इसका नया मॉडल GLM-5.2 मुख्य रूप से ‘एजेंटिक एआई’ के लिए तैयार किया गया है।
परंपरागत चैटबॉट्स के विपरीत, जो केवल पूछे गए सवालों के जवाब देते हैं, एजेंटिक मॉडल मानवीय हस्तक्षेप के बिना खुद ही लंबी और जटिल योजनाओं को बना सकते हैं, उन्हें निष्पादित कर सकते हैं और कार्यों को पूरा कर सकते हैं।
तकनीकी क्षमताओं की बात करें तो इस मॉडल में एक मिलियन ( करीब 10 लाख) टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है, जिसकी मदद से यह बिना किसी रुकावट के भारी-भरकम कोडबेस और बेहद लंबे दस्तावेजों को एक बार में प्रोसेस कर सकता है।
इसे विशेष रूप से कोडिंग, डिबगिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और एंटरप्राइज ऑटोमेशन के लिए डिजाइन किया गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंचमार्क टेस्ट में यह कोडिंग और एजेंट क्षमताओं के मामले में पश्चिमी देशों के अग्रणी मॉडल्स के बेहद करीब पाया गया है, वो भी बेहद कम परिचालन लागत पर।
भारत को मजबूत करना होगा अपना संपूर्ण AI इकोसिस्टम
चीन के इस नए एआई मॉडल के लॉन्च ने दुनिया भर में भले ही भारी उत्साह पैदा कर दिया हो, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को केवल इस एक मॉडल पर ध्यान केंद्रित करने से बचना चाहिए।
इसके बजाय, देश को अपने संपूर्ण एआई इकोसिस्टम के हर स्तर को मजबूत करने की सख्त जरूरत है। विशेषज्ञ के भारत को एआई इनोवेशन, साइबर सुरक्षा प्रतिभा, नियमन और कॉर्पोरेट स्तर पर इसे अपनाने जैसे सभी पहलुओं को समान रूप से प्राथमिकता देनी होगी, क्योंकि ये सभी तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को आगे बढ़ाते हैं।





