भ्रष्टाचार, अपराध, लचर शिक्षा पर एक्शन के बिना UP को विकास की पटरी पर नहीं ला सकते

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हाल में उत्तर प्रदेश तीन कारणों से चर्चा में रहा। पहला, लखनऊ में संपन्न हुआ निवेशक सम्मेलन, जिसमें 4.68 लाख करोड़ रुपये के निवेश हेतु एक हजार से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दूसरा, प्रदेश में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध योगी सरकार की बढ़ती सक्रियता और तीसरा, राज्य सरकार की नकल विरोधी नीति। भले ही ये तीनों सतह पर अलग-अलग प्रतीत होते हों, किंतु इनका एक दूसरे से गहरा संबंध है। बिना उद्योग-धंधों के किसी भी क्षेत्र का आर्थिक विकास संभव नहीं है। यदि वहां गुंडागर्दी और अपराध चरम पर है तो कोई भी उद्योग लगाने और उसे जारी रखने से घबराएगा। परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर सीमित रहेंगे। प्रतिस्पर्धा के युग में लचर शिक्षा व्यवस्था के कारण आवश्यक प्रतिभा का अत्यंत अभाव रहेगा जिससे युवा कुंठाग्रस्त होंगे और उन्हे रोजगार ढूंढ़ने में कठिनाई होगी।

भ्रष्टाचार, अपराध, लचर शिक्षा पर एक्शन के बिना up को विकास की पटरी पर नहीं ला सकते

 

योगी सरकार का अपराधियों में खौफ

किसी भी देश-प्रदेश में कानून-व्यवस्था कैसी है, वह मुख्यत: दो स्थितियों से निर्धारित हो सकती है। पहला, क्या अपराधियों में पुलिस का खौफ है? दूसरा, जनता का पुलिस पर कितना विश्वास है? उत्तर प्रदेश में दशकों से सत्ता-अधिष्ठान के आशीर्वाद से अपराध व्यापार बन गया था। भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं की सांठगांठ से संगठित अपराध में शामिल लोग अपने मजहबी जातीय निहित स्वार्थ की पूर्ति करते थे। आज वही समूह वर्तमान सरकार की अपराध के प्रति शून्य सहनशक्ति से इतने हतोत्साहित हो गए हैैं कि वह स्वयं को बचाने के जतन कर रहे हैैं।

अपराधियों पर सख्त कार्रवाई, पुलिस हुई सतर्क

अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई संबंधी कोलाहल के बीच दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार के अब तक के कार्यकाल में सैकड़ों लोगों को फर्जी मुठभेड़ों में मार गिराया गया है। सच क्या है? आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 19 मार्च 2017 से लेकर 14 फरवरी 2018 तक उप्र पुलिस ने 40 अपराधियों को मारा गिराया है और 1240 आपराधिक मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब तीन हजार अपराधियों को गिरफ्तार किया है। तथाकथित सेकुलरिस्टों के दोहरे मांपदंडों के कारण प्रदेश में अपराध रोकथाम से संबंधित कई महत्वपूर्ण घटनाएं सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा नहीं बन रही हैैं। वर्षों से अपनी कार्य संस्कृति और जनता के प्रति आचरण के लिए बदनाम प्रदेश का पुलिस विभाग परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। अब पुलिस महानिदेशक थानों में जाकर कनिष्ठ अधिकारियों सहित सिपाहियों के साथ सीधे बैठक कर रहे हैं। हाल के वर्षों में संभवत: पहली बार उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर कार्रवाई उनकी जाति, मजहब और राजनीतिक पहुंच देखे बिना हो रही है। पूर्ववर्ती शासन में यहां कानून-व्यवस्था का क्या हाल था, उसका एक शर्मनाक इतिहास है।

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नकल रोकने के लिए सरकार की सख्त नीति से 10 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी

शिक्षा विकास का महत्वपूर्ण सोपान है, किंतु उत्तर प्रदेश की गुणहीन शैक्षणिक व्यवस्था ने राज्य की कमजोर नींव को और अधिक खोखला करने का काम किया है। इस संबंध में योगी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैैं जिसमें नकल रोकने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाना प्रमुख है। इस सख्त नीति का परिणाम यह रहा कि राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षा दे रहे कुल 66 लाख छात्रों में से लगभग 10 लाख परीक्षा से ही भाग गए। सरकारी स्कूलों के अध्यापकों का स्तर भी सोशल मीडिया में वायरल वीडियो से स्पष्ट हो जाता है।

 

भारी निवेश का भरोसा

देश-विदेश के कई प्रमुख उद्योगपतियों सहित छह हजार प्रतिनिधियों ने निवेशक सम्मलेन में भाग लेकर भारी निवेश का भरोसा दिया है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने यहां कई घोषाणाएं की हैैं। इनमें बुंदेलखंड में 20 हजार करोड़ की लागत वाला रक्षा उत्पाद कॉरिडोर है। रायबरेली कोच फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता में तीन गुणा से अधिक वृद्धि के साथ झांसी में कोच नवीनीकरण फैक्ट्री और फतेहपुर में रेल पार्क की स्थापना है। जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अतिरिक्त प्रदेश में नौ अन्य एयरपोर्ट बनाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के अनुसार नोएडा और ग्रेटर नोएडा को आइटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सिंगापुर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। क्या यह सब संभव है? चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद आबादी के संदर्भ में विश्व के पांचवे बड़े देश ब्राजील की कुल जनसंख्या से भी अधिक लोग उत्तर प्रदेश में बसते हैैं।

 

उत्तर प्रदेश का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में विशेष स्थान

वर्तमान में उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 22 करोड़ है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था के समान है, जिसका मूल्य 14.8 लाख करोड़ रूपये है। भारत की कुल जनसंख्या में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बाद भी उत्तर प्रदेश का देश की आर्थिकी में योगदान लगभग आधा अर्थात 8.24 प्रतिशत है। आर्थिक रुप से पिछड़े उत्तर प्रदेश का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में विशेष स्थान है। शिवभक्तों के लिए काशी, श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और रामजन्मभूमि अयोध्या इसी भूखंड पर हैं। पौराणिक गाथाओं में उल्लिखित गंगा, यमुना और सरयू जैसी पवित्र नदियां यहीं से होकर बहती हैं। बौद्ध तीर्थस्थल सारनाथ और कुशीनगर भी उप्र का हिस्सा हैैं। सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। भारतीय पर्यटन का प्रमुख केंद्र ताजमहल भी यहीं है।

उत्तर प्रदेश की गणना देश के बीमारु राज्यों में होती है

ऐतिहासिक धरोहरों से सुसच्जित उत्तर प्रदेश उपजाऊ भूमि, प्राकृतिक संपदा, देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति और विशेष भौगोलिकता के मामले में धनवान है। इस राज्य की गणना देश के बीमारु राज्यों में होती है और कई क्षेत्रों की स्थिति तो अत्यंत दयनीय है। वर्ष 1951 के कालखंड में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत दर का 97 प्रतिशत थी जो 2014-15 में घटकर 40 प्रतिशत हो गई है।

 

क्या उत्तर प्रदेश का समेकित विकसित किए बिना भारत का संपूर्ण उदय संभव है?

समाज का एक वर्ग अक्सर, नोएडा और आसपास के क्षेत्र की संपन्नता को उत्तर प्रदेश के विकास के रुप में प्रस्तुत करता है। ऐसे लोग भूल जाते हैैं कि दिल्ली के निकट और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण इस इलाके का विकास संभव हुआ है जिसमें प्रदेश का योगदान सीमित रहा है। क्या उत्तर प्रदेश का समेकित विकसित किए बिना भारत का संपूर्ण उदय संभव है? हजारों करोड़ के निवेश के वादे तो हो गए, किंतु क्या इससे उत्तर प्रदेश का भाग्य बदल जाएगा? यह इस पर निर्भर करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कायाकल्प हेतु जो लक्ष्य और नीतियां निर्धारित किए हैं उसे लेकर राज्य के अकर्मण्य और भ्रष्टाचार की गोद में बैठे प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी कितनी तत्परता और ईमानदारी के साथ प्रदेश की विकास यात्रा में शामिल होते हैैं? भ्रष्टाचार, अपराध, लचर शिक्षा और प्रशासनिक अकर्मण्यता रूपी जो दुष्चक्र उत्तर प्रदेश के मार्ग में दशकों से कुंडली मारकर बैठे थे उस पर निर्णायक कार्रवाई का समय आ गया है।

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