फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि फ्रांस अपने क्षेत्र में प्रवासी नियंत्रण केंद्रों का निर्माण नहीं करेगा. ब्रसेल्स यूरोपीय परिषद की बैठक के उद्घाटन सत्र के बाद यूरोपीय संघ के नेताओं की प्रवासन नीति से जुड़े मुद्दों पर निष्कर्ष रिपोर्ट के प्रकाशित होने के चंद घंटों के भीतर मैक्रों ने यह बयान दिया.

इस निष्कर्ष सूची में कहा गया है कि यूरोपीय परिषद के सदस्य देश अपने यहां प्रवासी नियंत्रण केंद्रों का निर्माण करें. मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में इस तरह के केंद्रों के निर्माण का कोई तुक नहीं बनता. फ्रांस भूमध्यसागर से आने वाले शरणार्थियों को पनाह देने वाला देश नहीं है.

दुनियाभर में प्रवासियों का संकट बढ़ता जा रहा है. अल्जीरिया ने पिछले 14 महीने में करीब तेरह हजार शरणार्थियों को बिना किसी मदद के सहारा रेगिस्तान में छोड़ दिया है और उन्हें बंदूक की नोक पर आगे बढ़ने या मरने को मजबूर किया है.

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इन शरणार्थियों में छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. ये शरणार्थी 48 डिग्री सेल्सियस तापमान में बिना पानी और भोजन के चलते रहे. इनमें से ज्यादातर शरणार्थी नाइजीरिया का रुख कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार 2017 के अंत तक दुनियाभर में 6.85 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे. युद्धों, अन्य तरह की हिंसा और उत्पीड़न की वजह से दुनियाभर में विस्थापन की दर नई ऊंचाई पर पहुंच गई है और लगातार पांचवें साल 2017 में यह अत्यधिक दर्ज किया गया.

इसमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का संकट, दक्षिण सूडान का युद्ध और म्यामार से हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों के बांग्लादेश आने जैसे कारण शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार विस्थापन से सबसे ज्यादा प्रभावित विकासशील देश हैं. रिपोर्ट के अनुसार 2017 के आखिर में भारत में 1,97,146 शरणार्थी थे और 10,519 लोगों के शरण के मामले लंबित थे. पिछले साल के आखिर तक भारत से शरण मांगने वालों के करीब 40,391 मामले थे.