जब प्लेन में पायलेट और एयर होस्टेसट होते है बिल्कुल फ्री, यहाँ करते है ये काम सुनकर नहीं होगा यकीन

मान लिजिए आप दिल्ली से न्यूयॉर्क की डायरेक्ट फ्लाइट में सफर कर रहे हैं तो सोचिए इस फ्लाइट की एयर होस्टेस और पायलट 15 घंटे तक कैसे बिना आराम किये रह सकते हैं। जब मुसाफिर थक जाते हैं तो पायलट और एयर होस्टेस का क्या हाल होता होगा। इस दौरान पायलट कहां रहते हैं? इन सवालों के जवाब हम बता रहे हैं।

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पायलट का कमरा आरामदेह होता है। बिजनेस क्लास जैसी आरामदेह कुर्सियां, पीछे बिस्तर और साइड में वॉश बेसिन भी लगा होता है। पायलट यहां आराम से अपनी थकान उतार सकते हैं। 

ऐसा नहीं है कि हमेशा से पायलट के लिए ऐसी ही सुविधाएं थी। पहले पायलट के लिए एक छोटा सा आराम कक्ष होता था। पायलट अक्सर इसे ले कर शिकायत करते थे कि इसमें आराम करना ताबूत में लेटने जैसा महसूस होता है। पायलट इसमें लेट तो सकते हैं लेकिन ज्यादा हिलडुल नहीं सकते। इसके बाद पायलट की समस्याओं पर ध्यान दिया गया और उनकी दिक्कत दूर की गई।

जिस समय यात्री सो रहे होते हैं और एयर होस्टेस के पास कोई खास काम नहीं होता, वे इस तरह के चेंबर में आराम करने आ जाती हैं। यात्रियों को यह कभी देखने को नहीं मिलता।

विमान के अंत में इस तरह के चेंबर बने होते हैं। यहां तक पहुंचने का रास्ता इतना संकरा होता है कि एयर होस्टेस को अक्सर सिर झुका कर चलना पड़ता है। यहां छह से दस बिस्तर लगे होते हैं।

खास विमान में खास सुविधाएं होती हैं। यह है बोइंग 787 के ड्रीमलाइनर का केबिन। यह यात्री कक्ष के ऊपर बना होता है और पुराने केबिनों के मुकाबले काफी ज्यादा आरामदेह है। दोनों बिस्तरों के बीच जो पर्दा लगा है, वह सिर्फ रोशनी को ही नहीं, आवाज को भी रोकता है।

विमान का जब इंटीरियर डिजाइन किया जाता है, तब प्राथमिकता यात्री और उनका आराम ही होता है। बची खुची जगह में एयर होस्टेस के लिए केबिन बन जाते हैं। यहां वे सो तो सकती हैं लेकिन बाहर का नजारा देखने के लिए कोई खिड़की नहीं है।

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