सर्वे: क्या है बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट? क्या देश को वाकई इसकी जरूरत है इसकी?
नई दिल्ली. मुंबई-अहमदाबाद के बीच 2022 तक बुलेट ट्रेन चलाने का टारगेट है। यह ऐसी ट्रेन होगी जो 508 किमी का सफर तीन घंटे में तय करेगी। अभी दुरंतो दोनों शहरों के बीच का सफर साढ़े पांच घंटे में तय करती है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कॉस्ट 1.20 लाख करोड़ रुपए है। यानी हर किमी पर 236 करोड़ रुपए का खर्च है। ऐसे में कई सवाल भी उठ रहे हैं। क्या देश और मुंबई-अहमदाबाद को इस ट्रेन की जरूरत है? क्या इसकी बजाय एयर ट्रेवल के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना ज्यादा फायदेमंद नहीं होता? आपको रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट एंड रिसर्च के डीन डॉ. जनार्दन कोनेर इन सवालों के जवाब दिए…

सबसे पहले जानिए : क्या है बुलेट ट्रेन प्राेजेक्ट?
यह प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) कहलाता है। 1.20 लाख करोड़ रुपए के इस प्रोेजेक्ट की अभी नींव रखी जा रही है। मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किमी रूट पर 2022 तक बुलेट ट्रेन चलाने का टारगेट है।
12 स्टेशन, 350 kmph स्पीड, 3 घंटे का सफर
– मुंबई-अहमदाबाद रूट पर बुलेट ट्रेन की मैक्जिमम स्पीड 350 किमी/घंटा होगी। अभी यहां नॉर्मल ट्रेन से दूरी 7-8 घंटे की है।
– अगर बुलेट ट्रेन 12 स्टेशनों पर रुकेगी तो 3 घंटे में 508 किमी का सफर पूरा करेगी। यानी एवरेज स्पीड 170 किमी/घंटा होगी।
– अगर 4 ही स्टेशनों मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और वड़ोदरा पर रुकेगी तो दो घंटे में सफर पूरा कर लेगी। ऐसे में एवरेज स्पीड 254 किमी/घंटा होगी।
– अगर बुलेट ट्रेन 12 स्टेशनों पर रुकेगी तो 3 घंटे में 508 किमी का सफर पूरा करेगी। यानी एवरेज स्पीड 170 किमी/घंटा होगी।
– अगर 4 ही स्टेशनों मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और वड़ोदरा पर रुकेगी तो दो घंटे में सफर पूरा कर लेगी। ऐसे में एवरेज स्पीड 254 किमी/घंटा होगी।
– इस रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भड़ूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं। इनमें मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड होगा।
बुलेट ट्रेन का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा
– 508 किमी के रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा। कुल 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा।
– 508 किमी के रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा। कुल 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा।
– मुंबई में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के अंदर होगा। 25 किमी का रूट सुरंग से गुजरेगा। 13 किमी हिस्सा जमीन पर होगा। बुलेट ट्रेन 70 हाईवे, 21 नदियां पार करेगी। 173 बड़े और 201 छोटे ब्रिज बनेंगे।
– शुरुआत 10 कोच वाली बुलेट ट्रेन के साथ होगी। इसमें 750 लोग बैठ सकेंगे। बाद में 1200 लोगों के लिए 16 कोच हो जाएंगे। ट्रेन में हर दिन 36,000 पैसेंजर्स सफर करेंगे। यह ट्रेन रोजाना 35 फेरे लगाएगी।
SERVAY: बुलेट ट्रेनप्रोजेक्ट से उठते 5 सवाल
1) बुलेट ट्रेन की लागत में 80 नए एम्स बन जाएंगे, इतनी कॉस्ट में रेलवे का ढर्रा नहीं सुधर जाता?
– हर किमी पर ट्रेन, ट्रैक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कीमत 236 करोड़ रुपए आएगी। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की टोटल कॉस्ट 1.20 लाख करोड़ है। इससे देशभर में 80 नए एम्स बन सकते हैं। एक एम्स को बनाने पर खर्च 1500 करोड़ रुपए आता है।
– 1.20 लाख करोड़ का आंकड़ा 5 साल के रेलवे सिक्युरिटी फंड के बराबर है, जिसकी बढ़ते हादसों के चलते बहुत जरूरत है।
– 300 पेंडिंग प्रोजेक्ट के लिए रेलवे को 2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कॉस्ट से रेलवे के 150 पेंडिंग प्रोजेक्ट पूरे हो सकते हैं।
– 300 पेंडिंग प्रोजेक्ट के लिए रेलवे को 2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कॉस्ट से रेलवे के 150 पेंडिंग प्रोजेक्ट पूरे हो सकते हैं।
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EXPERT VIEW
– रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार: इसमें रेलवे की सिर्फ जमीन लग रही है। 1.20 लाख करोड़ की कॉस्ट में से 88% जापान दे रहा है, वो भी 0.1 इंट्रेस्ट रेट पर। यह कहीं से भी महंगा सौदा नहीं है। रेलवे सिक्युरिटी पर अच्छा काम हो रहा है। सुरेश प्रभु के लिए बदकिस्मती की बात रही कि रेल हादसे ज्यादा हो गए।
– नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट एंड रिसर्च के डीन डॉ. जनार्दन कोनेर: अगर अस्पतालों में बदइंतजामी होती है तो नए अस्पताल खोलना हम बंद नहीं कर देते। उसी तरह बुलेट ट्रेन में कोई बुराई नहीं है। इकोनॉमी के लिहाज से देखें तो इस प्रोजेक्ट की तुरंत जरूरत नहीं थी। आने वाले 10 साल में जरूरत जरूर थी। अगर जल्द शुरुआत हुई है तो इसमें बुराई नहीं है।
2) 25 ट्रेनें, 20 से ज्यादा फ्लाइट्स… फिर बुलेट ट्रेन क्यों चाहिए?
अभी क्या सुविधा: दोनों शहरों के बीच अभी 25 ट्रेनें, 20 से ज्यादा फ्लाइट्स और 40 से ज्यादा ट्रेवल कंपनियां की 95 वॉल्वो/डीलक्स बसें चलती हैं।
रेलवे ने क्या सोचा होगा: रेलवे ने यह सोचकर इस प्रोजेक्ट को आकार दिया है कि 2023 तक एक साल में मुंबई-अहमदाबाद के बीच डेढ़ करोड़ लोग ट्रेवल करेंगे। यानी 41 हजार लोग रोजाना। इनमें से 36 हजार पैसेंजर्स की जरूरत बुलेट ट्रेन से पूरी होगी।
EXPERT VIEW
– डॉ. जनार्दन कोनेर के मुताबिक, बुलेट ट्रेन को बिल्ट करने की कॉस्ट जरूर ज्यादा है, लेकिन इसकी मेनटेनेंस कॉस्ट एयर ऑपरेशंस से काफी कम है। अगर आप 36 हजार पैसेंजर्स को रोज ट्रेवल का मौका देना चाहते हैं तो उसके लिए आपके मुंबई-अहमदाबाद में शायद नए एयरपोर्ट की जरूरत पड़ती। ऐसा नहीं भी करते तो नई एयर स्ट्रिप्स बनानी पड़तीं। कॉस्ट वहां भी लगती।
3) सस्ती पड़ेगी दुरंतो, फिर बुलेट ट्रेन का क्या फायदा, वक्त भी एयर ट्रेवल से ज्यादा लगेगा?
– बुलेट ट्रेन का किराया 2700 से 3000 रुपए के बीच होगा। यह तीन घंटे लेगी।
– अभी मुंबई-अहमदाबाद का एक महीने बाद का एयर फेयर 1500 और कुछ दिन बाद का 4000 रुपए है। फ्लाइट 1 घंटा 10 मिनट का वक्त लेती है।
– अभी मुंबई-अहमदाबाद का एक महीने बाद का एयर फेयर 1500 और कुछ दिन बाद का 4000 रुपए है। फ्लाइट 1 घंटा 10 मिनट का वक्त लेती है।
– दुरंतो का किराया 2000 रुपए है। यह साढ़े पांच घंटे का वक्त लेती है।
– वॉल्वो बसों का किराया 1000 रुपए है। ये 531 किमी का सफर 10 घंटे में तय करती हैं।
– वॉल्वो बसों का किराया 1000 रुपए है। ये 531 किमी का सफर 10 घंटे में तय करती हैं।
EXPERT VIEW
-अरुणेंद्र कुमार- अाप एयरपोर्ट पहुंचने, बोर्डिंग पास लेने और सिक्युरिटी की जांच का टोटल टाइम काउंट करेंगे तो वह बुलेट ट्रेन के 3 घंटे के सफर से कहीं ज्यादा या उसके बराबर ही आएगा। बुलेट ट्रेन में आप 10 मिनट पहले पहुंचकर भी ट्रेन पकड़ सकते हैं। इसमें आप फ्लाइट से ज्यादा सामान ले जा सकते हैं। 2022 में हो सकता है कि फ्लाइट से कम किराया बुलेट ट्रेन में लगे।
4) भारत को क्या वाकई इस प्राेजेक्ट की जरूरत है?
– माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट 160 साल पुरानी भारतीय रेल में रिवॉल्यूशन लाएगा। शुरुआती तौर पर 20 हजार लोगों को सीधे इम्प्लॉयमेंट मिलेगा।
– इस प्राेजेक्ट के जरिए जब ट्रेनें मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनने लगेंगी तो इसका फायदा बाकी रूट्स पर भी मिलेगा। वहां कम कॉस्ट पर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जा सकेंगे।
EXPERT VIEW
– अरुणेंद्र कुमार: बुलेट ट्रेन भारत के लिए रिवॉल्यूशनरी साबित होगी। इससे दो जगहों के बीच आसान और तेज पहुंच होगी। काफी वक्त बचेगा। इम्प्लॉयमेंट बढ़ेगा। चुनौती सिर्फ इतनी है कि यह भारत में पहली बार हो रहा है, लेकिन आसानी इसलिए कि इस फील्ड का सबसे बड़ा माहिर जापान हमारे साथ है।
– डॉ. जनार्दन कोनेर:बुलेट ट्रेन में सफर करने वालों का असर उनकी प्रोडक्टिविटी में नजर आता है। देश की वर्कफोर्स को इससे हैप्पी फैमिली लाइफ मिलेगी। इससे इकोनॉमी पर भी असर पड़ेगा। ये बात जरूर है कि अगर पैसेंजर्स नहीं मिले तो सरकार को लंबे समय तक सब्सिडी देनी पड़ेगी। पैसेंजर मिले तो इन्वेस्टमेंट पर पूरा रिटर्न मिलेगा।
5) दुनिया में जहां कहीं बुलेट ट्रेन शुरू हुई, वहां क्या असर दिखा?
– लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के डॉ. गैब्रियल अल्फेल्ड्ट ने अपनी रिसर्च में बताया कि जिन शहरों से बुलेट ट्रेन गुजरी, वहां दूसरे शहरों के मुकाबले GDP ग्रोथ 2.7% ज्यादा थी।
– जापान में बुलेट ट्रेन चलाने वाली कंपनी शिंकान्सेन की रिसर्च बताती है जहां-जहां बुलेट ट्रेन के स्टेशन थे, उन शहरों की सरकारों का रेवेन्यू 155% बढ़ गया। वहीं, ये ट्रेनें ट्रेडिशनल रेल या रोड ट्रांसपोर्ट के मुकाबले 70% वक्त बचाती हैं।
– बीसीडी कंसल्टिंग ग्रुप की स्टडी बताती है कि बुलेट ट्रेनों में सवार होने का बोर्डिंग टाइम सिर्फ आठ से दस मिनट है, जबकि हवाई सफर में बोर्डिंग, टैक्सी और टेक ऑफ टाइम में एक से डेढ़ घंटे का वक्त चला जाता है।





