उन्नाव दुष्कर्म कांड: पेड़ से बांधकर की गई थी पीड़ित किशोरी के पिता की पिटाई

उन्नाव दुष्कर्म कांड में पुलिस का खेल ही उस पर भारी पड़ा। पीडि़त किशोरी के गंभीर रूप से घायल पिता को जेल भेजने के लिए उसके पास से तमंचा बरामद दिखाया गया था। आरोपित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के दबाव में स्थानीय पुलिस ने ऐसा कदम न उठाया होता, तो शायद पीडि़त किशोरी के पिता की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस के साथ ही उन्नाव जिला अस्पताल व उन्नाव जेल के डॉक्टरों ने भी इलाज में लगातार लापरवाही बरती, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई। सीबीआइ इन बिंदुओं पर भी सिलसिलेवार पड़ताल कर रही है।

उन्नाव कांड की जांच कर रही सीबीआइ आरोपित विधायक से कई चक्रों में पूछताछ कर चुकी है। विधायक व अन्य आरोपितों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कडिय़ां जोड़ी जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक पीडि़त किशोरी के पिता को विधायक पक्ष के लोग उसके घर से खींचकर लाए थे। एसआइटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पीडि़त किशोरी के पिता को पेड़ से बांधकर बर्बरता से पीटे जाने के साथ ही मौके से तत्कालीन एसओ माखी द्वारा घायल को थाने ले जाए जाने का जिक्र है।

सूत्रों का कहना है कि एसआइटी की जांच में पीडि़त किशोरी के पिता के पास से तमंचा बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई थी। स्थानीय पुलिस ने घायल को जेल भेजने के लिए उसके पास से असलहा बरामद दिखाया था। पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। अस्पताल प्रशासन भी विधायक के दबाव में था। यही कारण रहा कि गंभीर रूप से घायल आरोपित को भर्ती करने के बजाए जेल भेजा गया।

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विधायक पक्ष के लोगों ने पीडि़त किशोरी के पिता के साथ दिल्ली से आए नौकर किशोर की भी पिटाई की थी। अब सीबीआइ जांच में ऐसे कई तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट होने के साथ ही कई नए तथ्य भी सामने आएंगे। 

दुष्कर्म पीडि़ता के चाचा के दो मोबाइल ले गई सीबीआइ

दुष्कर्म पीडि़त किशोरी को न्याय दिलाने के लिए उसके चाचा ने पिछले करीब आठ माह से पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक से पत्राचार किया। पुलिस अधिकारी से लेकर आरोपी विधायक तक के फोन पर वॉइस रिकार्डिंग कर साक्ष्य एकत्र किए। सीबीआइ जांच शुरू होने के बाद यही दस्तावेज किशोरी पक्ष के उत्पीडऩ के मुख्य गवाह बने, जिन्हें लेने के लिए सीबीआइ ने उसके चाचा को दिल्ली भेजा था। मंगलवार को सीबीआइ टीम एक बार फिर गेस्ट हाउस पहुंची, जहां करीब छह घंटे तक पूरे परिवार से बात की और घटना से जुड़े साक्ष्य लिए। 
मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सीबीआइ की टीम डिप्टी एसपी आरआर त्रिपाठी की अगुआई में ङ्क्षसचाई डाक बंगले पहुंची। जहां उन्होंने पीडि़ता के चाचा से बात की और फिर उसके द्वारा दिए गए अब तक सभी प्रपत्रों को देखा। कुल 222 शिकायती पत्रों की प्रति भी सीबीआइ को सौंपी गई। इस बीच दो मोबाइल फोन सिम सहित और 32 जीबी का मेमोरी कार्ड सीबीआइ ने सील कर दिया। 

षडयंत्र रचने वालों की गिरफ्तारी की मांग 

पीडि़ता के चाचा ने सीबीआइ जांच पर तो संतोष जताया लेकिन, कहा कि अब तक घटना के षडयंत्रकर्ता खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने मांग की कि उन्हें भी जेल भेजा जाए। अब तक उनके असलहे और गाड़ी भी बरामद नहीं की गई है उन्हें भी पुलिस बरामद किए जाएं। इस पर अधिकारियों ने कहा कि जांच चल रही है। जल्दी ही अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी होगी। 

सीबीआइ ने पॉक्सो कोर्ट से लिए अभिलेख

सीबीआइ टीम ने मंगलवार को पाक्सो कोर्ट में तीन मामलों से जुड़े अभिलेख लेने को प्रार्थना पत्र दिया। तीनों मामलों से जुड़े अभिलेखों की नकल दे दी गई।

 
 

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