पाना चाहते है पूरा फल तो पूरे नवरात्र करें इन 3 देवियों की पूजा

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मां दुर्गा का मातृत्व स्वरुप मां स्कंदमाता को समर्पित है. पुराणों के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में कार्तिकेय यानी स्कन्द कुमार देवताओं के सेनापति बने थे और देवताओं को विजय दिलाई थी. इन्हें कुमार, शक्तिधर और मयूर पर सवार होने के कारण मयूरवाहन भी कहा जाता है. मां दुर्गा का यह नाम श्रीस्कन्द (कार्तिकेय) की माता होने के कारण पड़ा. स्कन्द कुमार बाल्यावस्था में मां स्कंदमाता की गोद में बैठें हैं. मां स्कंदमाता की सवारी सिंह हैं एवं भुजाओं में कमल पुष्प हैं. मां स्कन्द माता की आराधना करने वाले भक्तों को सुख शान्ति एवं शुभता की प्राप्ति होती है.

पाना चाहते है पूरा फल तो पूरे नवरात्र करें इन 3 देवियों की पूजापांचवें नवरात्र के वस्त्रों का रंग एवं प्रसाद मां स्कंदमाता की पूजा में आप श्वेत रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं. यह दिन बुध गृह से सम्बंधित शांति पूजा के लिए सर्वोत्तम है. नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवैद्य चढ़ाने से आप सदैव स्वस्थ रहेंगे.

नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा की पांचवीं शक्ति स्कंदमाता की आराधना होती हैं. भगवान स्कंद की माता होने होने के कारण मां दुर्गाकी इस पांचवीं शक्ति को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है.

भगवान स्कंद बालरूप में माता की गोद में विराजमान हैं. वहीं माता ने अपनी चार भुजाओं में से दाहिनी उपरी भुजा ने भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं. माना जाता है इनके आशीर्वाद से संतान का सुख मिलने के साथ ही दुखों से मुक्ति भी मिलती है.

नवरात्र में देवी की नौ शक्तियों की पूजा की जाती है, लेकिन मूल में तीन देवियां ही हैं- महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती. ये तीनों देवियां तीनों महादेवों की शक्ति हैं. नवरात्र में इन्हीं तीन शक्तियों की अलग-अलग रूप में पूजा की जाती है.

मां लक्ष्मी रूप की पूजा शक्ति स्वरूपा मां लक्ष्मी धनप्रदायनी हैं. लक्ष्मी से ही वैभव और यश मिलता है. वैसे लक्ष्मी की प्राप्ति सहज नहीं है. लक्ष्मी चंचला है, वह एक जगह टिक कर नहीं रहतीं, इसलिए शास्त्रों का मत है कि इनकी आराधना कभी भी अकेले नहीं करनी चाहिए. श्रीनारायण के साथ इनकी आराधना करें. देवी को अहंकार पसंद नहीं है. नवरात्र की नवमी महालक्ष्मी का दिन है. इस दिन इनकी विशेष आराधना करनी चाहिए.

विद्या की देवी सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का दूसरा आधार विद्या है. ज्ञान, कला, संगीत, गुणों से ही किसी व्यक्ति की समाज में पहचान होती है. उसको यश प्राप्त होता है. और इसकी प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की आराधना जरूरी है. लक्ष्मी अस्थिर हैं, चंचल हैं, लेकिन सरस्वती जी स्थायी हैं, शांत हैं और अपरिवर्तनशील हैं.

सौंदर्य व आरोग्य की देवी सौभाग्य और सौंदर्य की देवी मुख्यतयाः पार्वती और महालक्ष्मी दोनों हैं. मां के रूप में पार्वती ही पूज्य हैं. अक्षत सुहाग के रूप में लक्ष्मी जी की पूजा होती है. कौमारी के रूप में भी पार्वती की ही पूजा होगी, लक्ष्मी की नहीं. कन्या पूजन भी उसी के निमित है. ये समस्त पूजा क्रमश: श्रीनारायण और शंकरजी के साथ करनी चाहिए. नवरात्र प्रमुख रूप में आरोग्य का ही उत्सव है. ऋतु परिवर्तन से इसका नाता है. यह अपने शरीर का शोधन है.

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