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वानखेड़े स्टेडियम के बाहर IPL टिकटों की कालाबाजारी

क्या आप टी-20 मैच के टिकट ऑनलाइन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और वे आपको नहीं मिल रही हैं? तो अब परेशान मत होइए, टिकट आपको मिलेंगी भी नहीं। दरअसल, बड़ी मात्रा में टिकटों की कालाबाजारी हो रही है और दो महीने पहले ही सारी टिकट बिक चुकी हैं।

अब अगर आपको मैच की टिकट खरीदनी है तो वानखेड़े स्टेडियम के बाहर चनावाला, पिज्जा डिलीवरी ब्वॉय, झंडे और जर्सी बेचने वाले से संपर्क करना होगा। मंगलवार को मुंबई वर्सेस हैदराबाद मैच के टिकट वानखेड़े स्टेडियम के बाहर पुलिस की नाक के नीचे अवैध रूप से बेचे जा रहे थे।

800 रुपए की टिकटों को 3000 रुपए से लेकर 4000 रुपए के बीच में बेचा जा रहा है। हमारे सहयोगी अखबार मिड-डे ने टिकट बेचने वालों का स्टिंग ऑपरेशन कर सारे मामले का खुलासा किया है। दलालों ने दावा किया कि वे हर हफ्ते 20 हजार रुपए तक कमा लेते हैं। वीकेंड मैच होने पर उनकी कमाई और ज्यादा बढ़ जाती है।

दलालों ने दावा किया कि उन्होंने थोक में टिकट खरीदे और फिर उन्हें मैच से कुछ घंटों पहले उन्हें महंगे दामों में बेच दिया क्योंकि टिकट के लिए क्रिकेट प्रेमी कोई भी कीमत देने को तैयार थे। उनमें से ज्यादातर दलालों ने कहा कि उनका एक मुखिया है, जिसने उन्हें टिकट मुहैया कराए थे। उसने दो महीने पहले ऑनलाइन टिकट खरीद लिए थे।

स्टेडियम के बाहर पुलिस निष्क्रियता के बारे में जब मिड-डे ने डीसीपी (जोन-1) डॉ मनोज कुमार शर्मा से बात की, तो उन्होंने कहा कि हमने वानखेड़े स्टेडियम के पास एक दलाल को तीन टिकटों की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा है। बॉम्बे पुलिस अधिनियम के तहत उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हम लोगों से अपील करते हैं कि वे आगे आएं और जब भी टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग के बारे में उन्हें कोई भी जानकारी मिले, तो वे पुलिस को बताएं।

छह दलालों से बात की, सबने कहा मिल जाएगी टिकट

मिड-डे ने 12 टिकटों के लिए एक सौदा किया। इसके लिए छह दलालों से बात की। एमसीए लेन में रिपोर्टर एक दूसरे से मैच के बारे में बात कर रहे थे। तभी करीब 20 साल का एक युवक हमारे

रोहित: टिकट चहिए क्या?

रिपोर्टर: कितने में दोगे टिकट?

रोहित: तीन में एक टिकट मिलेगा।

रिपोर्टर: हम लोगों को पांच टिकट चहिए।

रोहित: मिल जाएगा। बाइक पर बैठो और चलो।

रिपोर्टर ने रोहित के साथ जाने से मना कर दिया और टिकट का मोलभाव करने लगे। वह थोड़ी देर बाद अपना मोबाइल नंबर देकर चला गया। उसने कहा कि जब असल चहिए होगा, तो कॉल कर लेना।

केस-2

हमें अगली बार मरीन ड्राइव पर एक व्यक्ति मिला, जिसने अपना नाम रमेश बताया और कहा कि वह वानखेड़े स्टेडियम में पिज्जा बेचता है। जब वह रिपोर्टर से बात कर रहा था, तो उन्होंने देखा कि उसकी जीन्स से एक आईडी कार्ड लटका था, जिसमें अमर नाम लिखा था।

 

रमेश: कितने टिकट चहिये?

रिपोर्टर: हमें छह टिकट चाहिए।

रमेश: रुको, मैं पूछ लेता हूं…

रमेश ने फोन पर किसी को फोन किया और पूछा कि टिकट हैं या नहीं। व्यक्ति ने हां कहा होगा, इसलिए रमेश ने कहा टिकट मिल जाएंगे, लेकिन हर टिकट के लिए हमें 3,500 रुपए खर्च होंगे।

रिपोर्टर: बहत जयादा बोल रहे हो, यार।

रमेश: इटना तो लेते ही हैं।

पास आया और उसने पूछा कि क्या हमें टिकट चाहिए। उसने खुद का नाम रोहित बताया।

 

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