विराट की टीम से खेलेगा यह गरीब घर का लड़का, किया माँ-बाप के सपनो को पूरा…

क्रिकेटर कुलवंत खेजरोलिया इस आईपीएल में रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू की ओर से खेलेंगे। कुलवंत को आईपीएल 2018 के लिए रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू ने 85 लाख रुपए में खरीदा है। कुलवंत 6 अप्रैल से शुरू होने वाले मैचों में रॉयल चैलेंजर की तरफ से पहला मैच 8 अप्रैल को सनराइज हैदराबाद के साथ होने वाले मैच में खेलेंगे।

विराट की टीम से खेलेगा यह गरीब घर का लड़का, किया माँ-बाप के सपनो को पूरा

बता दें कि कुलवंत खेजरोलिया झुंझुनूं के चूड़ी अजीतगढ़ गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता शंकर सिंह की छोटी सी किराने की दुकान हैं। यहां लोग कुलवंत को छोटू कहकर बुलाते हैं। कुलवंत की मां सरोज हाउस वाइफ है, जबकि दादा शिव प्रसाद और पिता गौरी शंकर की एक छोटी सी किराने की दुकान है जिससे परिवार का गुजारा चलता है।

मां सरोज ने इस सफलता के लिए कहा कि मैं स्वयं पढ़ी लिखी नहीं होने के बाद भी तीनों संतानों को पढ़ाया और उनकी रूचि अनुसार काम करने में किसी प्रकार की कमी उनको खलने नहीं दी। जिसके चलते बड़ा बेटा हेमंत राजस्थान रोडवेज में जॉब करते हैं। वही साथ में सीए की पढ़ाई जारी रखे हुए है। वहीं बहन खुशबू कंवर डबल एमए बीएड है।

विराट की टीम से खेलेगा यह गरीब घर का लड़का, किया माँ-बाप के सपनो को पूरा

कुलवंत के बड़े भाई हेमंत का कहना था कि छोटे को फ्यूचर के लिए फ्री छोड़ने की अपने पिता गौरी शंकर से रिक्वेस्ट की गई थी। घर की स्थिति अधिक अच्छी नहीं होने के बाद भी फाइनेंसियल हेल्प के बाद कुलवंत को दिल्ली ट्रेनिंग के लिए भेजा गया जिसका नतीजा सफलता के रूप में घरवालों को मिला।

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बहन खुशबू कंवर ने भी इस सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत व आत्म विश्वास व उसके जुनून को बताया। कुलवंत बाएं हाथ के पेश बॉलर के रूप में जाने जाते हैं। उनका कहना है वह 140 किलोमीटर की स्पीड में सक्षम है। एक ओवर की सभी गेंदे यार्कर फेंक सकता है। वह इंडियन टीम के सभी खिलाड़ियों व गौतम गंभीर तथा आशीष नेहरा से काफी प्रभावित है। उनका सिलेक्शन 2017 में रणजी ट्रॉफी के लिए भी हुआ था।

यह सफलता मेरे कोच संजय भारद्वाज की और मां सरोज व पिता गौरीशंकर बड़ा भाई हेमंत व बहन खुशबू कंवर के मार्गदशन व प्रेरणा के द्वारा मिली थी। बचपन से ही खेल के लिए जुनून को लेकर अपने लाइफ को संवारने की कोशिश आखिरकार सफलता की ओर बढ़ते चले गए। गांव के खेलकूद चैंपियनशिप में जब भी कुलवंत बाहर खेलने जाता था। दादा शिव प्रसाद को हर समय यह चिंता सताती थी कि मेरा पोता गलत रास्ते पर चलकर बिगड़ ना जाएं। जिसके लिए शाम ढलते ही पोते को लाने जहां भी खेलने जाता वहां चले जाते थे। खेल में मिली इस सफलता के बाद दादा इस खुशी से गदगद होकर फूले नहीं समा रहे है।

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