देश में 6 करोड़ लोगों के लिए आई बेहद बुरी खबर, अगर ऐसा ही रहा तो बहुत जल्द…

देश में सूखा, बाढ़ और ऐसी ही दूसरी जलवायु के कारण होने वाली आपदाओं से 2050 तक 4.5 करोड़ से ज्यादा लोग पलायन के लिए मजबूर होंगे। ‘जलवायु की निष्क्रियता की लागत: विस्थापन और संकट प्रवास’ रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के पांच देशों की स्थिति का आकलन किया गया है। सिर्फ दक्षिण एशिया से 2050 तक करीब 6 करोड़ लोग पलायन कर जाएंगे। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय एजेंसी एक्शनएड इंटरनेशनल और क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क साउथ एशिया द्वारा किए गए अध्ययन पर आधारित है।

पांच दक्षिण एशियाई देशों का आकलन : इस रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई देशों भारत, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के जलवायु ईंधन विस्थापन और प्रवासन का आकलन किया गया है। रिपोर्ट को आंतरिक जलवायु प्रवासन पर 2018 में इनोग्रल ग्राउंड्सवैल रिपोर्ट लिखने वाले ब्रायन जोंस के नेतृत्व में तैयार किया गया है।

दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन ज्यादा : रिपोर्ट में कहा गया है कि पेरिस समझौते के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने की राजनीतिक विफलता के कारण 2020 में पहले से ही 1.8 करोड़ लोग जलवायु परिवर्तन के कारण अपने घरों से पलायन कर चुके हैं। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट का अनुमान है कि दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन बहुत ज्यादा है।

विकसित देशों की जिम्मेदारी ज्यादा : एक्शनएड के ग्लोबल क्लाइमेट लीडर हरजीत सिंह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन सुरक्षा और नए साधनों की तलाश में लोगों को घरों से भागने के लिए मजबूर कर रहा है। विकसित देशों को चाहिए कि वे उत्सर्जन को कम करे और दक्षिण एशियाई देशों को उत्सर्जन कम करने में मदद करे।

महिलाओं के सामने बड़ी समस्या : क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क साउथ एशिया के निदेशक संजय वशिष्ट के अनुसार, सभी पांच देशों में महिलाओं को जलवायु पलायन से होने वाली नकारात्मक गिरावट से निपटने के लिए छोड़ दिया जाता है। 

 

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