केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुजफ्फरपुर रैली आज, जानिए भाजपा के लिए यह क्षेत्र क्यों है खास?

अमित शाह के मुजफ्फरपुर रैली को लेकर सियासत गरमा गई है। राजद जदयू और कांग्रेस के नेताओं ने इस दौरे को जुमलेबाजी करार दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए इस विशाल जनसभा का बेहद खास महत्व है। शहर तो केवल मुजफ्फरपुर है लेकिन इस रैली के जरिए पांच लोकसभा सीट टारगेट पर है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बिहार के मुजफ्फरपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैं। शाह के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से टाइट कर दी गई है। 1000 से अधिक पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है। हवाई अड्डे से लेकर रैली स्थल तक चप्पे चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात है।
अमित शाह की रैली के पीछे भाजपा की खास रणनीति
अमित शाह के मुजफ्फरपुर आने के पीछे भाजपा की खास रणनीति मानी जा रही है। भाजपा के लिए यहां की पांच लोकसभा सीट बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन सीटों में वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और समस्तीपुर है। इन सीटों को फिर से जीतना ही भाजपा का मुख्य उद्देश्य है।
जानें तिरहुत प्रमंडल की सीटों पर भाजपा का हाल
बता दें कि तिरहुत के छह लोकसभा सीटों में पांच पर एनडीए का कब्जा है। मुजफ्फरपुर से भाजपा सांसद अजय निषाद हैं। वहीं पूर्वी चंपारण की बात करें तो राधा मोहन सिंह सांसद हैं। वैशाली से लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति कुमार पारस हैं। शिवहर में रमादेवी हैं। पश्चिमी चंपारण में संजय कुमार जायसवाल हैं। लेकिन सीतामढ़ी में जदयू के सुनील कुमार पिंटू सांसद हैं।
बिहार पर शाह की विशेष नजर
भाजपा से जदयू के अलग होने के बाद शाह का 10 महीने में यह पांचवां दौरा है। 16 सितंबर को लोकसभा शाह की सभा झंझारपुर में हुई थी। इस वर्ष अमित शाह चार बार बिहार आ चुके हैं। 25 फरवरी को पश्चिमी चंपारण के लौरिया में आए थे। इसके दो महीने बाद दो अप्रैल को नवादा में उनका कार्यक्रम हुआ। तीसरी सभा 29 जून को जदयू अध्यक्ष ललन सिंह के संसदीय क्षेत्र मुंगेर के लखीसराय में हुई थी। झंझारपुर की सभा चौथी थी।
किसानों को भी साधने की कोशिश
अमित शाह की रैली में किसानों का भी साधने की तैयारी है। सभा में बड़ी संख्या में उत्तर बिहार के किसान, पैक्स अध्यक्ष और सहकारिता से जुड़े लोग रहेंगे। इस दौरान अमित शाह किसानों को दिए योजनाओं पर भी बोलेंगे।
जातिय गणना को लेकर अपना एजेंडा बता सकते हैं अमित शाह
माना जा रहा है कि बिहार सरकार द्वारा जातिय गणना कराने के बाद बिहार में सियासी समीकरण बदल सकता है। ओबीसी और एससी एसटी वोटर्स नीतीश और लालू के पाले में जा सकते हैं। इसलिए अब अमित शाह विपक्ष का जातिय कार्ड पर भी अपना एजेंडा जनता के सामने रखेंगे। अमित शाह रैली में धार्मिक कार्ड भी खेल सकते हैं। राम मंदिर और कश्मीर का मुद्दा भी उठा सकते हैं।





