UN सुरक्षा परिषद ने कोरिया के खिलाफ सर्वसम्मति से पारित किए और कड़े प्रतिबंध

वॉशिंगटनः संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध और कड़े करने के संबंध में अमेरिका द्वारा तैयार प्रस्ताव को शनिवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इसमें निर्यात पर भी रोक शामिल है जिसका लक्ष्य प्योंगयांग को एक अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व से वंचित करना है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद से उत्तर कोरिया के खिलाफ उठाया गया यह पहला इस तरह का कदम है और इसने अपने सहयोगी को दंडित करने की चीन की इच्छा को रेखांकित किया है.
राजदूतों का कहना है कि कुछ चीजों के निर्यात पर इस प्रस्तावित प्रतिबंध से उत्तर कोरिया को वार्षिक राजस्व में करीब एक अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. अमेरिका कई महीनों की बातचीत के बाद , उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु परीक्षणों को रोकने के लिए उस पर दबाव बनाने के मकसद से चीन के साथ एक समझौते पर पहुंचा है. चीन, उत्तर कोरिया का मुख्य व्यापारिक साझेदार और सहयोगी है
निर्यात से होने वाली आय में होगी एक तिहाई की कमी
इन प्रतिबंधों से नकदी पर निर्भर देश से मछलियों और सीफूड के साथ-साथ कोयला, लौह, लौह अयस्क के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया गया है. बातचीत से जुड़े एक राजदूत के अनुसार, अगर सभी देश इस प्रतिबंध को लागू कर देते हैं तो इससे उत्तर कोरिया को हर साल निर्यात से होने वाली तीन अरब डॉलर की कमाई में एक तिहाई आय कम होगी.
विदेशों में नहीं बढ़ा पाएगा अपने कामगार
अपने यूरोपीय सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया के समर्थन से अमेरिका संयुक्त राष्ट्र पर इस बात को लेकर जोर दे रहा है कि उत्तर कोरिया पर 4 जुलाई को उसके अंतर्महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण के जवाब में और कड़े प्रतिबंध लगाए जाए. इस प्रस्ताव के पारित होने पर उत्तर कोरिया विदेशों में अपने कामगारों की संख्या नहीं बढ़ा पाएगा जिससे नए उद्योग स्थापित करने और मौजूदा संयुक्त कंपनियों में नया निवेश करने पर प्रतिबंध लग जाएगा.
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प्रस्ताव के मसौदे में कहा गया है कि उत्तर कोरिया अपने दुर्लभ संसाधनों का परमाणु हथियारों का विकास करने और महंगी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में इस्तेमाल करने का जिम्मेदार है.
सातवीं बार लगाया जा रहा प्रतिबंध
ये नए प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र द्वारा उत्तर कोरिया पर वर्ष 2006 में पहली बार परमाणु परीक्षण करने के बाद से लेकर अब तक के सातवीं बार लगाए जाने वाले प्रतिबंध हैं. हालांकि पहले लगाए गए प्रतिबंधों से भी उत्तर कोरिया के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया.
प्रस्ताव का उल्लंघन करने पर सभी देशों में नहीं मिलेगी एंट्री
नए प्रस्ताव के तहत उत्तर कोरिया के जो जहाज संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए पाए जाएंगे उन्हें सभी देशों के बंदरगाहों में प्रवेश करने से वर्जित कर दिया जाएगा.
रुस नहीं करेगा समर्थन
चीन की तरह संयुक्त राष्ट्र में वीटो का अधिकार रखने वाले रूस ने चेतावनी दी है कि वह ऐसे प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करेगा जिससे उत्तर कोरिया का मानवीय संकट और खराब हो. जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों की दलील है कि कड़े प्रतिबंध आवश्यक हैं ताकि उत्तर कोरिया को उसके सैन्य कार्यक्रमों पर रोक लगाने के वास्ते बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके.
इस बीच, चीन और रूस ने कहा कि केवल प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया के व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा और इस समस्या से निपटने के लिए बातचीत जरुरी है. वहीं संयुक्त राष्ट्र में बातचीत के अंतिम चरण पर पहुंचने पर अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने घोषणा की कि अमेरिका यह नहीं चाहता कि उत्तर कोरिया में सरकार बदले और वह उत्तर कोरिया से बातचीत करने का इच्छुक है.





