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ट्रम्प-पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता के लिए कोशिशें हुई तेज

वॉशिंगटन : डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात हो सकती है। जानकारी के मुताबिक, रूस में मौजूद अमेरिकी राजदूत जॉन हंट्समैन इस मीटिंग को मुमकिन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह इस मायने में खास है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर टकराव रहा है। इनमें सीरिया, क्रीमिया और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में दखल जैसे मामले शामिल हैं।

किम से मुलाकात के बाद हो सकती है कोशिश

अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जरनल ने अमेरिका के एक वरिष्ठ प्राशासनिक अधिकारी के हवाले से बताया कि ये जॉन हंट्समैन का नया प्रोजेक्ट है, वह कई महीनों से ट्रम्प-पुतिन की आधिकारिक मुलाकात कराने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प 2 बार मिले हैं पुतिन से

ट्रम्प राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक दो बार पुतिन से मिले। दोनों के बीच पहली मुलाकात जुलाई 2017 में जी20 समिट के दौरान जर्मनी में हुई थी। दूसरी बार दोनों वियतनाम में एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कॉरपोरेशन समिट में मिले थे। ये मुलाकात पिछले साल नवंबर में हुई थी।

इसी साल मार्च में पुतिन और ट्रम्प ने फोन पर बात की थी। तब ट्रम्प ने पुतिन को वॉशिंगटन आने का न्योता दिया था।

रूस-अमेरिका की होड़ टकराव में बदली
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से रूस (तब सोवियत संघ) और अमेरिका में खुद को ताकतवर बताने की होड़ रही। फिर चाहे परमाणु हथियार विकसित करने की बात हो या अंतरिक्ष में कामयाबी का परचम लहराने की। हालांकि, एक समय के बाद यह होड़ दुश्मनी में बदल गई।

अभी अमेरिका और रूस की यूक्रेन और सीरिया मुद्दे पर एक-दूसरे से ठनी है। रूस ने 2015 में क्रीमिया को यूक्रेन से छीन लिया था। – सीरियाई गृहयुद्ध में रूस के दखल से भी अमेरिका उसके खिलाफ है। इसको लेकर अमेरिका 2014 में रूस पर प्रतिबंध लगा चुका है।

रूस पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल का भी आरोप
रूस पर 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में दखल का आरोप लगा। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई इसकी जांच कर रही है। इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प को जीत मिली थी।

इसी साल मार्च में ब्रिटेन ने रूस पर अपने जासूस को जहर देने का आरोप लगाया था। दरअसल, ब्रिटेन का कहना है कि रूस ने ब्रिटेन में किसी नागरिक पर हमला कर के उसकी स्वायत्तता पर हमला किया। इन आरोपों के बाद ब्रिटेन समेत कई देशों ने रूस के डिप्लोमैट्स को अपने देश से निकाल दिया था। इनमें अमेरिका भी शामिल था।

हालांकि, मॉस्को इस मामले में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है। इन आरोपों के जवाब में रूस ने खुद भी कई देशों के डिप्लोमैट्स को निकाल दिया था।

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