OMG…इस अनोखे अस्पताल में भर्ती होते हैं जहरीले सांप
सारनी। ये है एक अनोखा अस्पताल। जहां इंसान नहीं जहरीले सांप और अन्य वन्यप्राणी भर्ती होते हैं। जीं, सुनने में जरूर यह बात कुछ आश्चर्यजनक लगेगी। लेकिन यह बात बिलकुल सही है। यह अनोखा अस्पताल है मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के सारनी में। जो एक युवक के घर में चलता है। इसके लिए वह बाकायदा मरहम पट्टी के साथ एंटीबॉयोटिक दवाओं का उपयोग करते हैं.
।सांप पकडऩे में माहिर
शहर के आदिल खान जहरीले सांपों को पकडऩे में माहिर हैं। वह कहते हैं कि बारिश के दौरान कई प्रकार के सांप निकलते हैं। जो इनसे घबराकर कई बार इनपर हमला कर देते हैं जिससे यह घायल हो जाते हैं वह घायल सांपों को पकड़कर अपने घर में बने अस्पताल में ले जाकर उनका उपचार करते हैं फिर उन्हे जंगल में छोड़ देते हैं। बकौल आदिल उन्होंने सांपों को पकडऩे के लिए किसी प्रकार की कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली। वे खुद के खर्च पर ही इनका उपचार करते हैं।
घर में रखीं दवाएं, पूरा परिवार करता है देखभाल
पिछले सप्ताह सेंट्रल बैंक के पीछे कॉलोनी के एक घर में चैकर्ट किल बैंक सांप मिलने की सूचना पर जाकर उसे पकड़ा था, सारनी और बैतूल में उपचार नहीं मिलने पर आदिल का परिवार खुद की कार से उसे परासिया लेकर पहुंचा। यहां डॉ. पंकज माहोरे, और डॉ. अंकित मेश्राम ने उसका ऑपरेशन किया। यहां से सांप को वे अपने घर ले आए। किचन के स्टोर में बकेट में इसे रखा। किसी मरीज की तरह पूरे दिन इसकी देखरेख की जाती है। मम्मी सीमा खान घाव पर बीटाडाइन लगाती हैं तो छोटा भाई अनस खान उसे एंटीबायोटिक दवाएं खिलाता है। देखरेख पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है। पाटाखेड़ा से पकड़े सांप की स्थिति में अब काफी सुधार है।
यह जहरीले सांप हैं जहरीले सांपों में
कोबरा, रसल वाइपर, क्रेट, सॉ स्किल वाइपर, कैट स्नैक
बिना जहरीले सांप
धामन, चैकर्ट किल बैक, सैंड बोवा, अजगर व अन्य
खास बात
भारत में 90 फीसदी सांप जहरीले नहीं होते। सांपों से इको सिस्टम संतुलित रहता है। इसलिए इन्हें मारने पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रतिबंध लगाया है। अधिनियम में सजा और अर्थदंड का प्रावधान है।





