आज इस इस तरह करें विश्वकर्मा जी की पूजा, व्यापार में मिलेगी सफलता ही सफलता

हर साल विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। हर साल यह पूजा 17 सितम्बर को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। 
भगवान विश्वकर्मा की महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि उनके महत्व का वर्णन ऋग्वेद लिख कर किया गया है।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व-
सम्पूर्ण सृष्टि और कर्म व्यापार है वह विश्वकर्मा है। सहज भाषा मे यह कहा जा सकता है कि सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक है, जिन कर्मो से जीव का जीवन संचालित होता है। उन सभी के मूल में विश्वकर्मा है। अतः उनका पूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक ऊर्जा देता है वहीं कार्य में आने वाली सभी अड़चनों को खत्म करता है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त्त-
-इस वर्ष वृश्चिक लग्न जो कि सुबह 10:17 बजे से 12:34 तक है, विशेष लाभकारी व सफलतादायी है, क्योंकि मंगल पराक्रम भाव में उच्च का बैठा है।
ऐसे करें भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा-
-सर्वप्रथम श्री विश्वकर्मा जी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी,रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि की व्यवस्था कर लें।
-इसके बाद फैक्ट्री, वर्कशॉप, आॅफिस, दुकान आदि के स्वामी को स्नान करके सपत्नीक पूजा के आसन पर बैठना चाहिए।
-कलश को अष्टदल की बनी रंगोली जिस पर सतनजा हो रखें। फिर विधि-विधान से क्रमानुसार पूजा करें। पूजा में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।





