गठिया से लड़ना है तो सिर्फ दवाई ही नहीं, खाने और कसरत पर भी दें ध्यान

एक निजी फर्म में कार्यरत मनोज जो कई सालों से रीढ़ में दर्द से पीड़ित रहते आए हैं, अपनी समस्या के लिए डॉक्टर के पास पहुंचे थे। वहां उनका कूल्हे का एक्स-रे सामान्य आया जबकि ईएसआर और सीआरपी नामक जांचों का स्तर बढ़ा हुआ आया। ऐसे में डॉक्टर ने सीरोनेगेटिव स्पॉन्डिलोआर्थ्रोपैथी नामक गठिया सोचते हुए उन्हें एमआरआई कराने की सलाह दी है। डॉक्टर का कहना यह है कि एक्स-रे में गठिया-संबंधित बदलाव न दिखने पर भी एमआरआई उन्हें प्रकट कर सकता है।

गठिया से लड़ना है तो सिर्फ दवाई ही नहीं, खाने और कसरत पर भी दें ध्यान

मनोज के एमआरआई में सचमुच स्पॉन्डिलोआर्थ्रोपैथी के बदलाव स्पष्ट हैं। उनके लक्षणों, इस जांच और खून की पिछली जांचों के आधार पर इस गठिया-रोग की पुष्टि हो गई है। अब डॉक्टर उनसे उपचार संबंधित बात करते हैं।

मनोज से वे कहते हैं कि उन्हें धुम्रपान का व्यसन छोड़ना होगा। ऐसा पाया गया है कि गठिया-रोगियों के रोग की उग्रता सिगरेट-बीड़ी का सेवन करने से बढ़ जाती है। भोजन उन्हें पौष्टिक और संतुलित लेना होगा। साथ ही नित्य व्यायाम की आदत डालनी होगी।

सीरोनिगेटिव स्पॉन्डिलोआर्थ्रोपैथी में डॉक्टर उनसे रीढ़ के कई व्यायाम क्रमवार ढंग से करने को कहते हैं। इन व्यायामों से रीढ़ में धीरे-धीरे समाप्त हो रही लोच बनी रहती है। अन्यथा इस गठिया में रीढ़ की हड्डियों के आपस में जुड़ जाने के कारण रोगी एकदम जकड़ जाता है। उसका घूमना-मुड़ना-झुकना सब प्रभावित हो जाता है। इसलिए मनोज को रोज समय निकाल कर रीढ़ के सारे व्यायाम करने होंगे।

साथ में फिर डॉक्टर उन्हें कुछ दवाएं शुरू करते हैं। ये दवाएं केवल दर्द का निवारण नहीं करतीं, ये जोड़ों के इन्फ्लेमेशन को कम करती हैं। इन्फ्लेमेशन वह कारण है, जिसकी वजह मनोज को दर्द और अकड़न महसूस होती है। अतः इन दवाओं को लेने से इन लक्षणों में कमी आएगी। साथ ही उन्हें यह भी बताया जाता है कि इन दवाओं को डॉक्टर के निर्देशानुसार ही लेना चाहिए। अपने-आप मेडिकल-स्टोर से इन्हें खाना सही नहीं है, इससे दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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मनोज पूछते हैं कि क्या इस रोग को जड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता। और अगर इन दवाओं और व्यायाम से उन्हें फायदा न हुआ , तब क्या होगा। डॉक्टर उन्हें बताते हैं कि इस रोग पर पूरे संसार में चल रहे शोध के बाद भी इसका कोई एक कारण नहीं कि जिसे हटा दिया जाए और बीमारी खत्म हो जाए। इसके होने के पीछे कई बातें ज़िम्मेदार हैं। अगर उन्हें कसरत और दवाओं से फ़ायदा नहीं होगा, तो इससे बेहतर दवाएं और इंजेक्शन भी उपलब्ध हैं, लेकिन उनका प्रयोग उचित स्थिति में ही किया जाएगा।

मनोज को सकारात्मक सोच के साथ विदा किया जाता है। उनका उपचार आरम्भ हो चुका है। अब उन्हें निर्देशों पर अमल करना है और समय पर दिखाना है। रीढ़ के इस गठिया-रोग से लड़ने के लिए उन्हें और डॉक्टर को आपस में सहयोग करना होगा।

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