बुरे कर्मों के लिए उकसाता हैं यह ग्रह, धुएं जैसा होता हैं इसका रंग

राहु छाया ग्रह होने से इसको किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं मिला है। यद्यपि इसे कन्या राशि का स्वामी मानते हैं। यह आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहु की उच्च राशि वृषभ मानी गई है और नीच राशि वृश्चिक। छाया ग्रह होने कारण राहु जिस ग्रह की राशि में होते हैं उसी के अनुसार फल देते हैं। राहु के पूर्ण दृष्टि 5, 7 एवं नौवें स्थान पर पड़ती है। यह तमोगुणी  एवं अंधकार प्रिय ग्रह है। इसको पापी ग्रह की संज्ञा मिली है। राहु की स्वराशि कन्या मानी गई है। इस के मित्र ग्रह शनि और केतु हैं। सूर्य, चंद्रमा और बुध, राहु के शत्रु  हैं।

मंगल इसका सम ग्रह हैं। राहु का रंग धुएं की तरह होता है। यह पृथकतावादी ग्रह है। राहु कूटनीति, राजनीति, झूठ कपट, षड्यंत्र कारक ग्रह है। वायु विकार देने वाला, उत्प्रेरक (उकसाने वाला) और हवाई यात्रा कारक ग्रह है।
लोग राहु का नाम सुनकर बहुत ही अशुभ मानते हैं। लेकिन शनि की तरह यदि आपके कर्म अच्छे हैं और कर्म भाव में शनि  या राहु का शुभ प्रभाव है तो आप राजनीति में अच्छा कर सकते हैं। राहु कालसर्प दोष का कारक है। जब राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह एक और हो जाते हैं तब वह कालसर्प दोष बनता है। राहु सर्प का मुख माना गया है और केतु सर्प का पुच्छ माना गया है। यदि राहु केतु के साथ में कोई ग्रह हो या एक ग्रह बाहर हो और वह राहु-केतु से अंशों में अधिक हो तो कालसर्प दोष कट जाता है। राहु के साथ मंगल होने से अंगारक दोष बनता है। यह दोष व्यक्ति के अंदर अहं एवं क्रोध का निर्माण करता है। यह ग्रह चोट आदि भी देता है।


यदि कुंडली में पंचम या षष्ठ भाव में  व्यक्ति को पेट रोग देता है। द्वितीय अथवा द्वादश भाव में राहु या शनि हो मंगल हो तो उस व्यक्ति को नेत्र पीड़ा हो सकती है। छठे भाव में राहु, केतु, शनि, मंगल के प्रभाव के पैरों में चोट आदि का भय रहता है। राहु की महादशा 18 साल होती है। यदि कुंडली में  राहु अशुभ होता है तो व्यक्ति को बुरे कर्म करने को उकसाता है। सबसे पहले व्यक्ति की दिनचर्या को खराब करता है। घूमने-फिरने का शौक पैदा करता है। वाणी दोष उत्पन्न करता है और विवेकहीनता उसके अंदर आ जाती है।‌ अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं रह पाता। उसको घूमना, फिरना, मांस-मदिर का शौक पड़ जाता है। यदि राहु की महादशा में आप उपरोक्त अवस्था से पीड़ित हो रहे हैं तो समझो कि आप के साथ राहु  बहुत बुरा करने वाला है। अपयश, धोखा,आर्थिक हानि, मानसिक विकार एवं तलाक हो सकता है।

कुंडली में राहु अच्छी अवस्था में हो तो वह अपने महादशा में रंक से राजा बना देता है। राजनीति में राहु अपना उच्चतम स्थान रखता है और किसी साधारण व्यक्ति को भी राजा बना सकता है। यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है या महादशा में अशुभ प्रभाव  दे रहा है तो आप कुत्ते को दूध रोटी खिलाएं। कोढियों को भोजन दान करें। मछलियां को आटे की गोलियां खिलाएं। राहु के तांत्रिक मंत्र का जाप कराएं और अपनी दिनचर्या बदले। राहु की अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए रांगे की गोली सफेद धागे में बुधवार को गले में धारण करें। रांगा और गोमेद राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं। रांगा जो बर्तनों में टांका लगाने का काम आता है बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी को राहु अत्यंत पीड़ित कर रहा हो या किसी बालक को नजर अधिक लगती हो, अज्ञात भय रहता हो तो रांगे की गोली सफेद धागे में धारण करें। 

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