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इस मंदिर में दिखाया जाता है मरने के बाद कैसे दी जाती है पापों की सजा, जानिए कहा हैं ये मंदिर

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहा लोग नरक देवता के लिए जाते है जैसा की हम जानते है ठंडे देशों में नरक की कल्पना हिमाच्छादित लोक और गर्म देशों में अग्नितप्त लोक के रूप में मिलती है। इसकी स्थिति, संख्या, प्रकार और दंडयातना के संबंध में विविध कल्पनाएँ हैं। हिंदू नरक दक्षिण और पाताल के निम्नतल भाग में कल्पित है, जहाँ चित्रगुप्त की पुष्टि पर यमदेवता पापी को उसके अपराध के अनुसार 28 नरकों में से किन्हीं की यातना देने का निर्णय अपने दूतों को देते हैं। अथर्ववेद से भागवत पुराण तक आते आते नरकों की संख्या 50 करोड़ हो गई जिनमें 21, 28 या 40 मुख्य हैं नरक के स्वरूपों और परलोक में पापियों के प्रति दंड की धारणा का क्रमिक विकास हुआ है। भारतीय नरक कल्पना का इतिहास ऋग्वैदिक अथवा उससे भी प्राचीन हो सकता है।

मन्दिर भारतीय धर्मों सनातन धर्म, जैन धर्म,…

 

मन्दिर भारतीय धर्मों सनातन धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म आदि हिन्दुओं के उपासनास्थल को मन्दिर कहते हैं। यह अराधना और पूजा-अर्चना के लिए निश्चित की हुई जगह या देवस्थान है। यानी जिस जगह किसी आराध्य देव के प्रति ध्यान या चिंतन किया जाए या वहां मूर्ति इत्यादि रखकर पूजा-अर्चना की जाए उसे मन्दिर कहते हैं। मन्दिर का शाब्दिक अर्थ ‘घर’ है। वस्तुतः सही शब्द ‘देवमन्दिर’, ‘शिवमन्दिर’, ‘कालीमन्दिर’ आदि हैं।

और मठ वह स्थान है जहां किसी सम्प्रदाय,…

 

और मठ वह स्थान है जहां किसी सम्प्रदाय, धर्म या परंपरा विशेष में आस्था रखने वाले शिष्य आचार्य या धर्मगुरु अपने सम्प्रदाय के संरक्षण और संवर्द्धन के उद्देश्य से धर्म ग्रन्थों पर विचार विमर्श करते हैं या उनकी व्याख्या करते हैं जिससे उस सम्प्रदाय के मानने वालों का हित हो और उन्हें पता चल सके कि उनके धर्म में क्या है। उदाहरण के लिए बौद्ध विहारों की तुलना हिन्दू मठों या ईसाई मोनेस्ट्रीज़ से की जा सकती है। लेकिन ‘मठ’ शब्द का प्रयोग शंकराचार्य के काल यानी सातवीं या आठवीं शताब्दी से शुरु हुआ माना जाता है।

अब हम आपको बताने जा रहे है जहा मंदिर…

 

अब हम आपको बताने जा रहे है जहा मंदिर शब्द सुनते ही मन में देवी-देवताओं की मूर्ति और भक्तिमय माहौल की बात आती है, लेकिन दक्षिण-पूर्वी एशिया के देश थाईलैंड के शहर चियांग माइ में एक ऐसा मंदिर है जहां श्रद्धालु देवी-देवता नहीं बल्कि नर्क के दर्शन के लिए आते हैं। यहां भक्त किसी देवता की पूजा नहीं करते बल्कि मृत्यु के बाद आत्मा द्वारा पापों के लिए मिलने वाली सजाओं को देखने आते हैं। मंदिर में कई मूर्तियां हैं, जो पाप के बदले नर्क में दी जाने वाली पीड़ाओं को दर्शाती हैं।

यहाँ है नर्क मंदिर इस मंदिर सनातन धर्म…

 

यहाँ है नर्क मंदिर इस मंदिर सनातन धर्म और बौद्ध धर्म से प्रेरित है। इस मंदिर की सभ्यता तथा संस्कृति पर भी काफी हद तक भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है। थाईलैंड की राजधानी बैंकाक से लगभग 700 किलोमीटर दूर चियांग माइ शहर में लगभग 300 मंदिर हैं लेकिन यह नर्क मंदिर अपने आप में न केवल अनूठा है बल्कि पूरी दुनिया का इकलौता मंदिर है।

बौद्ध भिक्षु ने इसलिए बनवाया था यह मंदिर…

 

बौद्ध भिक्षु ने इसलिए बनवाया था यह मंदिर इस मंदिर को बनाने का मूल विचार एक बौद्ध भिक्षु प्रा क्रू विशानजालिकॉन का था। वे लोगों को बताना चाहते थे कि पाप करने तथा पीड़ा पहुंचाने का परिणाम अंत में दुःखदायी होता है। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने नर्क की परिकल्पना करते हुए एक ऐसा मंदिर बनवाया जहां लोग मृत्यु के बाद आत्मा द्वारा भोगे जाने वाले कष्टों को देख सकें।

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यहां लगी हुई हैं भयानक मूर्तियां सिर्फ नाम…

 

यहां लगी हुई हैं भयानक मूर्तियां सिर्फ नाम से नहीं, बल्कि देखने में भी यह मंदिर नर्क की तरह दिखाई देता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां नहीं है वरन मृत्यु के बाद नर्क में किस तरह की यातनाएं दी जाती हैं, उसका प्रदर्शन करने वाली मूर्तियां है। यहां की हर मूर्ति नर्क की पीड़ा और कष्टों का संकेत देती हैं।इस मंदिर में लोग अपने पापों का प्रायश्चित तथा पश्चाताप करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को ‘वैट मे कैट नोई’ टेम्पल भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों में मान्यता है कि जो यहां के दर्शन कर लेता है वह अपने पापों का प्रायश्चित कर लेता है। आप भी इस मंदिर में जाये और दरसन जरूर करे ।

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