ऐसे करें 2 मिनट में नकली और असली मावे की पहचान…

गुझिया के बिना होली का त्योहार एकदम फीका है. रंगों के इस त्योहार को और भी ज्यादा खुशनुमा मनाने के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने गुझिया परोसी जाती है. कई घरों में तो गुझिया इतनी ज्यादा क्वांटिटी में बनाई जाती है कि होली खत्म होने के कई दिन बाद तक लोग इसका जायका लेते हैं. इसे मावा भरकर मनाया जाता है. वहीं, त्योहारों के सीजन में ही खोए में सबसे ज्यादा मिलावट की शिकायत सामने आती हैं. अगर आप भी गुझिया के लिए बाजार से मावा खरीद रहे हैं तो दो मिनट में इसकी क्वालिटी चेक कर सकते हैं.

1. खोए के जरा से टुकड़े को हाथ के अंगूठे पर थोड़ी देर के लिए रगड़ें. अगर इसमें मौजूद घी की महक अगर देर तक अंगूठे पर टिकी रही तो समझ लीजिए मावा एकदम शुद्ध है.

2. हथेली पर मावे की एक गोली बनाएं और उसे देर तक दोनों हथेलियों के बीच घूमाते रहें. अगर ये गोली फटने लगे तो समझ जाइए कि मावा नकली या मिलावटी है.

3. 5 मिली लीटर गर्म पानी में करीब 3 ग्राम खोया डालें. थोड़ी देर ठंडा होने के बाद इसमें आयोडीन सॉलूशन डालें. इसके बाद आप देखेंगे कि नकली खोए का रंग धीरे-धीरे नीला पड़ने लगेगा.

4. आप चाहें तो मावा खाकर भी असली-नकली की परख कर सकते हैं. अगर मावे में चिपचिपाहट महसूस हो रही है तो समझ लीजिए कि वो खराब हो चुका है. असली मावा खाने पर कच्चे दूध जैसा स्वाद आएगा.

5. पानी में मावा डालकर फेंटने पर अगर वो छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है तो ये उसके खराब होने की निशानी है. दो दिन से ज्यादा पुराना मावा खरीदने से बचें. इसे खाने से आपकी सेहत खराब हो सकती है.

6. कच्चे मावे की बजाय अगर आप सिंका हुआ मावा खरीदें तो बेहतर होगा. इससे बनी मिठाई का स्वाद भी ज्यादा बेहतर होगा और इसके जल्दी खराब होने की संभावना भी कम होती है.

नकली मावे से बनी मिठाई खाने से आपकों फूड पॉइजनिंग, उल्टी, पेट दर्द की समस्या हो सकती है.

नकली मावे से बनी मिठाइयां किडनी और लिवर के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती हैं.

नकली मावा आपकी पाचन क्रिया को भी बाधित करता है जिससे आपको अन्य पेट संबंधित रोग हो सकते हैं.

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