कुछ इस तरह होगी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन, जानें इसके नतीजे से जुड़ी…

साल 2020 खत्म होने की कगार पर है और दुनिया 2021 में एक नए दशक की शुरुआत की ओर बढ़ रही है. साल 2020 में जहां दुनिया ने कोरोना वायरस का उदय, पीक और तबाही देखी तो वहीं उससे लड़ने के लिए साजो-सामान जमा किए, तैयारियां कीं और इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया. 

लेकिन 2021 में लोगों की नजरें सिर्फ वैक्सीन पर होंगी. हालांकि कई देशों में इस साल भी टीकाकरण शुरू हो गया है लेकिन पूरी आबादी तक पहुंचाने का काम अगले साल तक ही हो पाने की संभावना नजर आती है. वैक्सीन बनाने वाली कई कंपनियों और संस्थानों में भारत की स्वदेशी कंपनियां भी शामिल हैं, जिसमें से एक है स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन. जानें इस स्वदेशी वैक्सीन के बारे में A से Z तक. 

भारत बायोटेक कोवैक्सीन (BBV152) को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से विकसित कर रहा है. कोवैक्सीन कोविड-19 के खिलाफ इम्युनिटी पैदा करने में सक्षम है और पहली दो स्टडी के दौरान कोई साइड इफेक्ट भी नहीं मिले हैं. हैदराबाद स्थित कंपनी द्वारा पब्लिश किए गए रिसर्च पेपर में यह दावा किया गया है. हालांकि इसकी अभी तक समीक्षा नहीं की जा सकी है.

जानें ट्रायल और स्टोरेज के बारे में

इस वैक्सीन को 2 डिग्री से 8 डिग्री के तापमान में स्टोर किया जा सकता है. यानी इसमें रखखराव को लेकर कोई झंझट नहीं होगा. इस वैक्सीन का पहला ट्रायल जुलाई-अगस्त के दौरान हुआ था, जिसमें 375 कैंडिडेट्स पर इसे टेस्ट किया गया था. इसमें शामिल कैंडिडेट्स की उम्र 18-55 वर्ष की थी. देश के 11 सेंटर्स और 9 राज्यों में यह परीक्षण किया गया था. वहीं दूसरे ट्रायल में 380 उम्मीदवार शामिल थे, जिनकी आयु 12 साल से लेकर 65 साल के बीच थी. यह ट्रायल 9 सेंटर्स पर 9 राज्यों में किया गया.

ट्रायल रिपोर्ट में कहा गया कि टीका लगवाने के बाद 6-12 महीने तक यह मानव शरीर में एंटीबॉडीज डेवेलप करता है. एक चीज जो इन तथ्यों को और रोचक बनाती है वो ये कि कोवैक्सीन पहली कोविड-19 वैक्सीन है, जिसे 12 साल तक के बच्चों पर टेस्ट किया गया है. यह टेस्ट सितंबर में किया गया था. भारत बायोटेक करीब 26000 उम्मीदवारों पर 25 सेंटर्स पर फेज 3 की स्टडी के दौरान वैक्सीन की क्षमता को परख रही है. 

कैसे काम करती है

ह्यूमोरल इम्यून रेस्पॉन्सेज एंटीबॉडी के कारण होती है, जबकि कोशिका-मध्यस्थता प्रतिक्रियाएं टी-कोशिकाओं के कारण होती हैं, जो अनुकूली प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रमुख घटक हैं जिनका काम संक्रमित कोशिकाओं को मारना, अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करना, साइटोकिन्स का उत्पादन करना और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को विनियमित करना शामिल है. एंटीबॉडीज के बाद ये शरीर के दूसरे स्तर का इम्यून सिस्टम है, जिनका काम प्रतिरोधक सिस्टम से जुड़ना और इसे संक्रमित कोशिकाओं से बचाना है.

पहली दो स्टडीज में क्या सामने आया?

भारत बायोटेक के मुताबिक, उम्मीदवारों पर किए गए परीक्षण के नतीजों में पाया गया कि दोनों ह्यूमोरल और सेल-मीडिएटेड रेस्पॉन्सेज देखे गए और कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा. इसके अलावा कोई गंभीर या जानलेवा खतरा भी नहीं देखा गया. 

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