कोरोना वायरस को लेकर दुनिया के सामने आई चीन की ये बड़ी सच्चाई, सरकारी दस्तावेज में…

कोरोना वायरस दुनियाभर में कहर बरपा रहा है. लेकिन क्या चीन कोरोना को लेकर कोई झूठ बोल रहा है? असल में चीन सरकार के कुछ दस्तावेज मीडिया में लीक हो गए हैं और ये दस्तावेज सरकार के दावे से अलग कहानी कहते हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला..

इस वक्त दुनिया में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या 145,000 पार कर गई है, वहीं मृतकों की संख्या 5 हजार हो चुकी है. भारत में भी दो लोगों की मौत हो चुकी है. इटली में मृतकों की संख्या 1266 हो गई है. इससे कोरोना वायरस के कहर का अंदाजा लगाया जा सकता है.

चीन ने कहा था कि कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान से हुई. लेकिन चीनी अधिकारी ने 7 जनवरी को ये जानकारी दी थी उन्होंने मरीजों में नए वायरस के संक्रमण का पता लगाया है. सरकार ने कहा था कि संक्रमण का पहला मरीज एक महीने पहले 7 दिसंबर को बीमार पड़ा था. लेकिन क्या यह सच है? या चीन दुनिया के सामने अपनी नाकामी छुपा रहा है?

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को एक क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट हाथ लगा है. मीडिया में लीक हुआ ये सरकारी दस्तावेज चीन के दावे से अलग कहानी पेश करता है.

सरकार का जो दस्तावेज लीक हुआ है उससे पता चलता है कि कोरोना वायरस का एक मरीज 17 नवंबर 2019 को ही ट्रेस कर लिया गया था. चीन के हुबेई प्रोविन्स में यह मरीज मिला था. वुहान हुबेई की राजधानी है.

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, लीक दस्तावेज इस बात की ओर इशारा करते हैं कि 17 नवंबर को कोरोना वायरस मरीज को ट्रेस करने के करीब 2 महीने बाद चीन ने वुहान सहित कई शहरों में बड़ी कार्रवाई की थी और प्रतिबंध लगाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, हुबेई में रहने वाले 55 साल के शख्स के अंदर 17 नवंबर को कोरोना वायरस का संक्रमण मिला था. रिपोर्ट में बताया है कि इसके बाद से हर दिन एक से 5 नए मामले सामने आने लगे.

वहीं, लीक दस्तावेज में इस बात की भी जानकारी मिलती है कि 31 दिसंबर से पहले तक सरकारी अधिकारियों ने कोरोना वायरस से संक्रमित 266 लोगों की पहचान कर ली थी.

बता दें कि चीन और अमेरिका के बीच कोरोना वायरस को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए गए हैं. अमेरिका की ओर से जहां कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहा गया है, वहीं, चीन ने कहा है कि अमेरिकी सैनिक की वजह से चीन में ये वायरस आया.

 

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