शिक्षकों के लिए MP हाईकोर्ट का ये बड़ा आदेश कहा, पढ़ाई के अलावा न लें कोई दूसरा काम
ग्वालियर.शिक्षकों को शौचालय के गड्ढे खुदवाने और उसी दिन शाम को फोटो भेजने के भी आदेश दिए गए हैं। यह शासन की मनमानी की पराकाष्ठा है। यह बात अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने शुक्रवार को ग्वालियर हाईकोर्ट में शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य कराने के विरोध में लगाई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। कोर्ट ने आदेश दिए कि शिक्षकों से कोई भी गैर शैक्षणिक कार्य नहीं कराया जाए। राजपत्रित प्रधानाध्यापक प्रादेशिक संघ समिति की अध्यक्ष अर्चना राठौर ने जून 2017 में यह याचिका दायर की थी। इसमें हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के जस्टिस शील नागू व जस्टिस एके जोशी यह आदेश दिए।

श्री भदौरिया ने तर्क रखा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट)-2009 की धारा-27 के तहत शिक्षकों को पढ़ाई के अतिरिक्त चुनाव, जनगणना और आपातकालीन स्थिति में ही डयूटी पर लगाया जा सकता है। लेकिन प्रदेश शासन द्वारा शिक्षकों को सामूहिक विवाह में पूड़ी बांटने, सर्वे कार्य, खुले में शौच को रोकने, प्याज बेचने, कुंभ के मेले में जूते-चप्पल स्टैंड आदि जगह ड्यूटी पर पहुंचा दिया जाता है, यह नियम विरुद्घ है। इस पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। वहीं, शासन की ओर से इस याचिका का विरोध करते हुए जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य कराने पर रोक लगा दी। साथ ही केंद्र व राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब तलब किया।
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बच्चे डिप्रेशन में जा रहे हैं, हमें पढ़ाने दो
अर्चना राठौर ने जनहित याचिका में कहा था कि शिक्षकों की डयूटी अन्य जगह लगाने से स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। छात्र तनाव में जा रहे हैं इसलिए उनकी अन्य डयूटी से राहत दी जाए।





