शबनम के सिर पर मंडरा रहा है मौत का खतरा, बस बचने की हैं एक उम्मीद

शबनम बीते 13 सालों से जेल में है. इनमें से 12 साल उसने मुरादाबाद की जेल में गुजारे हैं. जबकि बीते एक साल से शबनम रामपुर की जेल में बंद है. अब जब इस जेल से शबनम बाहर आएगी तो फिर उसकी आखिरी मंजिल होगी मथुरा की जेल क्योंकि फांसी मथुरा की जेल में ही होनी है. लेकिन शबनम और फांसी की बीच अभी भी कुछ वक्त लग सकता है. शबनम के बेटे ने राष्ट्रपति से एक अपील की है, अपील ये कि उसकी मां को माफ कर दिया जाए. क्या ये अपील काम करेगी, आखिर शबनम का ये बेटा कौन है, कहां, किसके साथ रहता है, शबनम के बेटे को गोद लेने की वजह क्या है?

सात कत्ल की गुनहगार शबनम और फांसी के फंदे के बीच उम्मीद की आखिरी किरण बस वो बच्चा है. यानी शबनम का बेटा. जो अपनी मां के लिए रहम की अपील कर रहा है. पर ये अपील शबनम को फांसी के फंदे से बचा पाएगी या नहीं ये तो आनेवाले दिन बताएंगे. पर फिलहाल का सच ये है कि शबनम रामपुर ज़िला कारागार में अपने बचे खुचे दिन कपड़े सिलकर काट रही है.

जितनी उम्र शबनम के गुनाह की हुई है, उससे बस दो महीने छोटी उम्र उसके बेटे बिट्टू की है. बिट्टू उसका असली नाम नहीं है. असली नाम और चेहरा हम बताना भी नहीं चाहते क्योंकि एक तो ये अभी नाबालिग है और दूसरा इसकी पहचान आम होने से इस बच्चे के दिल और ज़ेहन पर बुरा असर पड़ सकता है. वैसे भी जुर्म शबनम ने किया तो तोहमतों का दाग़ इस मासूम पर क्यों आए. लेकिन आज शबनम की कहानी से हट कर आपको इस बच्चे की कहानी आपको बताते हैं. ये कहानी हरेक को सुननी चाहिए. क्योंकि अगर शबनम जुर्म की पहचान बन चुकी है, तो इस बच्चे की परवरिश इंसान और इंसानियत और भी ज़्यादा यकीन बढ़ा देती है.

शबनम के बेटे को जब खुद शबनम और शकील के घरवालों ने अपनाने से इनकार कर दिया. अनाथालय के अलावा उसके लिए कोई दूसरी जगह बची नहीं थी. तब दो लोग फरिश्ते बनकर बिट्टू की ज़िंदगी में आते हैं. बिट्टू के नए मां-बाप. उस्मान और वंदना. दरअसल, उस्मान और शबनम अमरोहा के एक ही गांव के थे. दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे. दोनों दोस्त थे. मगर शबनम अपने ही घर के सात लोगों का खून कर जेल गई थी और जेल में ही उसने बिट्टू को जन्म दिया था. इसके बावजूद उस्मान शबनम को बेटे को गोद लेना चाहता था. पर सवाल था क्यों?

दरअसल, शबनम और उस्मान जब कॉलेज में थे, तो शबनम ऐसी नहीं थी. इसलिए उस्मान उसके असली रूप को दुनिया के सामने लाना चाहता था. उसने शबनम पर एक किताब लिखने का मन बना लिया. वो लगातार जेल जाता रहा. लेकिन कई बार वो मिलती नहीं थी. पर उस्मान उससे मिलने जाता रहा. क्योंकि वो उसे जानता था. शबनम जेल में मां बन चुकी थी. उस्मान उसके बच्चे को पाना चाहता था. उसे गोद लेना चाहता था.

पर बिट्टू उस्मान को आसानी से नहीं मिला. क्योंकि शबनम बिट्टू को उस्मान के हवाले नहीं करना चाहती थी. उस्मान ने इसकी वजह बताई. फिर भी उस्मान हिम्मत नहीं हारा. वो जेल के चक्कर काटता रहा. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी के भी पीछे पड़ा रहा. इसी दौरान सीडब्लयूसी ने उस्मान को ये कहा कि वो बिट्टू को उसे नहीं सौंप सकते, क्योंकि उस्मान कुंवारा है. इतना सुनना था कि उस्मान ने बिट्टू को पाने के लिए अगले दो घंटे में शादी कर ली. 

शादी के बाद भी राह आसान नहीं थी. शबनम तब भी अपने बिट्टू को उस्मान को सौंपना नहीं चाहती थी. सीडब्ल्यूसी के समझाने पर शबनम तैयार हो गई. तीन शर्तों के साथ. पहली ये बिट्टू को तीन महीने के लिए ही इन दोनों को सौंपा जाएगा. 

अगर तीन महीने उन्होंने सही परवरिश की, तो आगे देखा जाएगा. तीन महीने बाद जब उस्मान और वंदना बिट्टू को लेकर पहली बार शबनम से मिलाने जेल गए, तो शबनम को यकीन नहीं हुआ कि बिट्टू पहले से ज़्यादा अच्छा और स्वस्थ हो चुका था. इसी के बाद शबनम ने अपने बिट्टू को हमेशा के लिए इन दोनों को सौंप दिया. पर दो शर्तों के साथ. पहली- वो बिट्टू का असली नाम बदल देंगे और दूसरी- वो कभी उसे उसके गांव लेकर नहीं जाएंगे.

अब बिट्टू अपने नए मां-बाप के साथ बेहद खुश था. बिट्टू के लिए मां-बाप ने अपना घर भी छोड़ दिया. नई जगह आकर रहने लगे. नए स्कूल में बिट्टू का दाखिला करा दिया. और इसके साथ ही दोनों ने एक ऐसा फ़ैसला लिया जिसे सुन कर फिर से इंसानियत पर यकीन करने को जी चाहता है. बिट्टू से प्यार कहीं कम ना हो जाए, इसलिए दोनों ने तय किया है कि वो कभी अपने बच्चे को जन्म नहीं देंगे. 

उस्मान और वंदना के लिए अब बिट्टू ही इनकी दुनिया है. वो इसे पढ़ा लिखा कर एक अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं. खुद बिट्टू भी जज बनना चाहता है. अब पता नहीं इसके पीछे उसकी क्या सोच है.  वैसे पिछले हफ्ते तक इनकी दुनिया बेहद सुकून भरी थी. लेकिन अचानक शबनम की फांसी की सुगबुगाहट ने इनकी दुनिया में भूचाल ला दिया. मीडिया के कैमरे इन तीनों का पीछा करने लगे. मीडिया की बातें बिट्टू के कानों तक भी पहुंचीं. इसी के बाद वो अपने मां-बाप से शबनम के गुनाहों के बारे में सवाल पूछने लगा. 

अब वो अपनी नानी से बात करके रोता है. अभी इसी रविवार को उस्मान और वंदना बिट्टू को लेकर रामपुर जेल गए थे. बिट्टू को शबनम से मिलवाने. शायद बिट्टू थोड़ा बहुत शबनम के बारे में समझने और जानने लगा है. शायद यही वजह है कि जब बिट्टू शबनम के पास जेल में मिलने जाता है. तो कई बार मां होने के नाते वंदना को बुरा भी लगता है.

वैसे पिछले 13 सालों में पिछले रविवार को ऐसा पहली बार हुआ जब शबनम ने खुद को बेक़सूर बताया. वरना इससे पहले जज के सामने तक वो अपना जुर्म कबूल कर चुकी है. उस्मान के मुताबिक जब वो रविवार को जेल गया, तो उसने शबनम से फिर वही सवाल पूछा कि तुम अपराधी हो या नहीं. तो शबनम ने पहली बार कहा कि वो निर्दोष है. उसने कहा कि मैंने नहीं मारा, मुझे तो पुलिसवाले ने पीटकर कबूल करवाया.

बहुत मुमकिन है कि फांसी करीब देख कर शबनम मौत से बचने के लिए आखिरी तरीका इस्तेमाल कर रही है. सोशल मीडिया और मीडिया का कुछ हिस्सा बिट्टू की असली पहचान को उजागर कर रहा है. उसकी तस्वीरें दिखा कर उसका असली नाम बताकर. इससे बिट्टू के दिल और ज़ेहन पर गलत असर पड़ सकता है. क्योंकि शबनम के जुर्म के लिए बिट्टू को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए. बिट्टू के नए मां-बाप को बस इसी बात का डर है. वो चाहते हैं कि उन तीनों को शबनम की उस खूनी कहानी से दूर ही रखा जाए. ऐसा होना भी चाहिए.

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