फिर क्यों IS की हैवानियत की असली कहानी, पर्दा डालती रही सरकार?

साल 2014 में इराक के मोसुल से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने 40 भारतीयों को अगवा किया था. इनमें से हरजीत मसीह अकेला ऐसा शख्स था, जो भाग कर भारत आया था. उस वक्त उसने 39 भारतीय लोगों के मौत की बात कही थी. इसके बावजूद सरकार ने यह बात नहीं मानी और तीन साल तक इस बात पर पर्दा डाले रखा.

ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर सरकार ने 39 भारतीय लोगों की मौत को छिपाए क्यों रखा? इस बारे में कांग्रेस नेता प्रताप बाजवा ने आरोप लगाया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मोसुल के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित किया है. 40 में से 31 लोग पंजाब के गरीब परिवार से आते थे. पीड़ितों के परिवार ने विदेश मंत्री से कई बार मुलाकात भी की. ये सभी गरीब परिवार से आते हैं.

क्या थी हरजीत मसीह की कहानी?

उस वक्त मसीह ने बताया था कि आईएस के आतंकी 50 बांग्लादेशियों और 40 भारतीयों को उनकी कंपनी से बसों में भरकर किसी पहाड़ी पर ले गए थे. यहां उन्होंने हम सभी को किसी दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया. यहां दो दिन तक हम बंदी बनाकर रखे गए.

बाद में एक दिन हमें कतार में खड़ा होने को कहा गया और सभी से मोबाइल और पैसे ले लिए गए. इसके बाद, उन्होंने दो-तीन मिनट तक गोलियां बरसाईं. मैं बीच में खड़ा था, मेरे पैर पर गोली लगी और मैं नीचे गिर गया और वहीं चुपचाप लेटा रहा. बाकी सभी लोग मारे गए. मसीह ने बताया कि वह किसी तरह वहां से भागकर वापस कंपनी पहुंचा और फिर भारत भाग आया.

हरजीत की कहानी को क्यों बताया सुषमा ने झूठ?सुषमा ने राज्यसभा में कहा कि,  “हरजीत की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता.’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो.’

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