अफगानिस्‍तान के लोगों की मदद के लिए तालिबान सरकार के साथ करना होगा काम: बोरिस जानसन

लंदन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने कहा है कि उनके पास अफगानिस्‍तान के लोगों की मदद करने के लिए वहां की तालिबान सरकार के साथ काम करना ही होगा। इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्‍प नहीं है। ब्रिटेन की पार्लियामेंट में लेबर पार्टी की साराह चैंपियन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्‍होंने ये जवाब दिया है। उन्‍होंने पूछा था कि अफगानिस्‍तान के हालात किसी नरक जैसे बन गए हैं। ऐसे में ब्रिटेन की सरकार अफगानिस्‍तान के लोगों की मदद के लिए कैसे और क्‍या कर रही है। इसके जवाब में जानसन ने कहा कि अफगानिस्‍तान के लोगों की मदद के लिए ब्रिटेन को तालिबान के साथ मिलकर और उसके सहयोग से ही आगे बढ़ना होगा। इसके अलावा कोई दूसरा विकल्‍प है। ही नहीं।

टोलो न्‍यूज के मुताबिक जानसन का कहना था कि अफगानिस्‍तान के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। ऐसे में वहां पर जल्‍द से जल्‍द लोगों को मदद पहुंचाने की दरकार है। ये तब तक संभव नहीं है जब तक तालिबान सहयोग न करे। लिहाजा इसके लिए तालिबान को साथ लेकर चलना बेहद जरूरी है, तभी इस मानवीय संकट से अफगानिस्‍तान को बचाया जा सकता है। उन्‍होंने ये भी कहा कि इस बात का कोई सवाल नहीं उठता है कि ब्रिटेन इस मुद्दे पर एक तरफ हो गया है या नहीं। उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही अफगानिस्‍तान में वर्तमान समय में कोई सही नेतृत्‍व नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वहां पर एक सरकार की मौजूदगी जरूर है। इसलिए ब्रिटेन को उनके साथ सहयोग के लिए आगे बढ़ना ही चाहिए और बढ़ना ही होगा। हम वहां के लोगों की मदद की बात कर रहे हैं इसलिए ये बेहद जरूरी है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन के इस बयान का तालिबान की तरफ से भी स्‍वागत किया है। टोलो न्‍यूज के मुताबिक इस्‍लामिक अमीरात आफ अफगानिस्‍तान के उप प्रवक्‍ता इनामुल्‍लाह समंगनी ने बोरिस के बयान पर कहा कि तालिबान उनके बयान का स्‍वागत करता है। उन्‍होंने ये भी कहा कि इस बयान के बाद दोनों तरफ से होने वाले सहयोग से तालिबान के साथ बाहरी दुनिया के संबंध मजबूत और बेहतर हो सकेंगे। समंगनी ने ये भी कहा कि तालिबान ने बातचीत के लिए किसी भी देश के लिए दरवाजे बंद नहीं किए हैं। सभी के लिए दरवाजे खुले हुए हैं। यदि इसमें कोई भी समस्‍या है तो उसको भी बातचीत के जरिये हल किया जा सकता है।

जानकार भी मानते हैं कि यदि बाहरी दुनिया तालिबान के साथ मिलकर चलना चाहेगी तो अफगानिस्‍तान के हालात जल्‍द सुधारे जा सकते हैं। इससे अफगानिस्‍तान को आगे बढ़ने में भी मदद मिल सकेगी।

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