स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मशरूम की खेती कर आत्म निर्भर बनेंगी महिलाएं…

घर की चहार दीवारी से निकल कर आधी आबादी अब अपनी आर्थिक उन्नति के साथ ही देश के विकास में भागीदार बन रही है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं मशरूम की खेती कर कम लागत में दो से तीन गुना आमदनी की रही हैं। महिलाएं खुद के साथ ही दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दिलाकर उनके कदमों को विकास के राह पर बढ़ाने का काम कर रहीं हैं।

सूबे में राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्‍वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अब मशरूम की खेती का निश्शुल्‍क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्रामीण महिलाओं को सशक्‍त बनाने के लिए विभाग की ओर से लखनऊ के सभी मंडलों में ग्रामीण महिलाओं को मशरूम की तीन प्रजातियों के उत्‍पादन के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। विभाग की ओर से अलग अलग चरणों में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। अब तक विभाग की ओर से 300 परिवारों को निश्शुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लखनऊ के 400 और परिवारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

कम समय में अब होगी अधिक आमदनीः तीन अलग अलग प्रकार के मशरूमों के उत्‍पादन के बारे में महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। जिसमें मिल्‍की, आयस्टर और बटन मशरूम शामिल हैं। अलग अलग वातावरण के अनुकूल मशरूमों की खेती कर महिलाएं साल भर तक कम पूंजी में अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लखनऊ अपनी मांग के हिसाब से लगभग 50 प्रतिशत मशरूम का ही उत्पादन हो पाता है लेकिन अब मांग के सापेक्ष उत्पादन होने लगा है। मशरूम के एक बैग को तैयार करने में 100 रुपए की लागत आती है। जिसे बेचकर महिलाएं 300 से 400 रुपए तक की आमदनी कर रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के स्‍वरोजगार को बढ़ावा देने के संकल्प को आगे ले जाने का प्रयास राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से किया जा रहा है। स्‍वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कम लागत में अधिक आमदनी कर रही हैं। कोई भी महिला या महिलाओं का समूह निश्शुल्क प्रशिक्षण लेकर काम शुरू कर सकता है। पारंपरिक खेती के बजाय मशरूम खेती के जरिए अधिक आय हो सकती है।

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