हाई कोर्ट ने अभियोजन संचालनालय के संचालक को रिकार्ड पेश करने के दिए निर्देश

हाई कोर्ट ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अभियोजन संचालनालय में पूर्णकालिक कर्मचारियों को पार्ट टाइम का बता कर बीए एलएलबी का कोर्स करने की अनुमति देने में घोटाला हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल आफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार 2006 के बाद केवल फुल टाइम कोर्स संचालन की ही अनुमति है। अभियोजन संचालनालय द्वारा पूर्णकालिक कर्मचारियों को विधि पाठ्यक्रम करने की अनुमति देने में एक बड़े घोटाले का खुलासा संभावित है।मामला एडीपीओ भर्ती के लिए पात्रता से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने पक्ष रखा। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ अभियोजन संचालनालय के संचालक को खुद के हलफनामा पर पिछले 15 साल का रिकार्ड पेश करने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने पूछा है कि किन परिस्थितियों में कितने ऐसे फुल टाइम कर्मचारियों को विधि कोर्स करने की अनुमति दी। यह भी बताएं कि ये अनुमति फुल टाइम कोर्स के लिए थे या पार्ट टाइम के लिए। इन पाठ्यक्रमों में दी गई डिग्रियों की क्या वैधानिकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि स्वयं का शपथ पत्र पर उक्त तथ्य और रिकार्ड पेश नहीं किए गए तो संचालक अभियोजन संचालनालय को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा। मामले पर अगली सुनवाई आठ अप्रैल को होगी। यह खुलासा तब हुआ जब याचिकाकर्ता भोपाल निवासी सीमा वहाने ने बताया कि उसे भोपाल के मदन महाराज निजी महाविद्यालय ने बीए एलएलबी कोर्स करने सुबह 7 से 9 बजे की पार्ट टाइम क्लास में शामिल होने की अनुमति दी है। कोर्ट ने इस कालेज को भी याचिका में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। अधिवक्ता ब्रह्मानंद पांडे ने कोर्ट को बताया कि ऐसे कई कर्मचारियों को कोर्स करने की अनुमति अभियोजन संचालनालय और कालेजों ने दी है। उन्होंने यह दलील दी कि ऐसे कर्मचारियों ने नौकरी के साथ-साथ ला डिग्री हासिल की और एडीपीओ की परीक्षा उत्तीर्ण कर अधिकारी भी बन गए। याचिकाकर्ता ने 2017 में याचिका दायर कर बताया कि वह सहायक ग्रेड-टू के पद पर कार्यरत है और उसे भी अन्य उम्मीदवारों के समान ला डिग्री पूरी करने पर एडीपीओ के पद पर प्रमोशन दिया जाना चाहिए।

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