किसानों को सरकार जल्द देने जा रही है अब तक का सबसे बड़ा तोहफा, सुनकर ख़ुशी से झूम उठेंगे आप

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केंद्र सरकार जल्द ही एक नीति लाएगी, जिससे किसानों को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य सुनिश्चित होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग राज्यों के साथ चर्चा के बाद नीति का एक मसौदा लाई है, जिसपर विचार-विमर्श के बाद जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।

किसानों को सरकार जल्द देने जा रही है अब तक का सबसे बड़ा तोहफा, सुनकर ख़ुशी से झूम उठेंगे आप रबी के बाद खरीफ फसलों के दाम भी होंगे संशोधित
मंत्री ने वादा किया कि अधिसूचित फसलें जिनका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत मूल्य की तुलना में 50 फीसदी से अधिक नहीं है, उनके एमएसपी को जून में शुरू होने वाले खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ऊपर की तरफ संशोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ फसलों के एमएसपी पहले से ही उत्पादन लागत की तुलना में 50 फीसदी से अधिक हैं।

बजट में सरकार ने की थी घोषणा
उल्लेखनीय है कि बजट 2018-19 में केंद्र सरकार ने एमएसपी को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना तय करने की घोषणा की थी। केंद्र ने 22 कृषि-वस्तुओं का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। सिंह ने आश्वासन दिया कि जब कीमतें एमएसपी से नीचे आएंगी तो सरकार हस्तक्षेप करेगी और किसानों के हितों की रक्षा करेगी, भले ही सरकारी कोष को इससे नुकसान हो।

फिक्की के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह सच है कि इससे सरकारी कोष पर दबाव बढ़ेगा। प्रधानमंत्री सरकारी कोष को लेकर चिंतित नहीं हैं। देश के किसान व मजदूर सरकारी कोष से ऊपर हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्पादन की लागत घटाने के साथ ही बाजार को मजबूत करने और उत्पादन के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर समग्र प्रयास किए जा रहे हैं।

एमएसपी को मात्र एक सुरक्षा कवच बताते हुए नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अशोक दलवाई ने कहा कि सरकार एक प्रतिस्पर्धी कृषि-बाजार को अस्तित्व में लाने के लिए कदम उठा रही है और लाभकारी मूल्य एमएसपी नहीं है।

अब मक्का का बढ़ाया जाएगा उत्पादन
किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के उद्देश्य के तहत केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मक्के की फसल का उत्पादन और इसकी गुणवत्ता में कैसे सुधार हो, इसके लिए सीएसआईआर के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।

पांचवे मक्का शिखर सम्मेलन 2018 का यहां उद्घाटन करते हुए राधा मोहन सिंह ने बताया कि इस समय देश में मक्का की जितनी खेती होती है, उसमें से महज 15 फीसदी जमीन ही सिंचित है। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से इसका उत्पादन कम होता है। इसलिए सरकार ने इसकी उत्पादकता बढ़ाने और मक्के की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया है और लुधियाना के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

25 फीसदी लोगों तक ही सीमित
अधिकारियों का कहना है कि पौष्टिक एवं अन्य गुणों से भरपूर मक्का का उपयोग अभी भी देश की अधिकतर आबादी नहीं करती। अभी तक इसकी पहुंच महज 25 फीसदी लोगों तक ही हो पाई है। सरकार चाहती है कि कम कीमत पर अधिक से अधिक लोगों को पोषक आहार उपलब्ध कराने में मक्का भी बेहतर भूमिका हो सकती है। भारत में सबसे ज्यादा खेती धान एवं गेहूं की होती है और इसके बाद मक्का का ही स्थान आता है।

28 राज्यों में दिया जा रहा बढ़ावा
कृषि मंत्री का कहना है कि इस समय केंद्र सरकार ने 28 राज्यों के 265 जिलों में मक्के की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक मिशन की शुरुआत की गई है। वर्ष 2015-16 से ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60 अनुपात 40 के फार्मूले पर इस मिशन को लागू किया जा रहा है।

नहीं मिल रहा एमएसपी
मक्का शिखर सम्मेलन के दौरान ही एक विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि सरकार को यह सब चीजें शिखर सम्मेलन के दौरान ही याद आता है। सरकार ने मक्का का एमएसपी 1425 रुपये घोषित कर रखा है लेकिन बिहार के गुलाब बाग मंडी में आज की तारीख में मक्का हाजिर 1250 रुपये प्रति क्विंटल पर उपलब्ध है।

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