दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल के घर पर लगे कैमरे में छेड़छाड़ होने की बात पर दी ये सफाई

दिल्ली के मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री केजरीवाल के घर पर हुई हाथापाई के मामले में दिल्ली पुलिस ने कैमरों से छेड़छाड़ की बात पर अपनी सफाई दी है।

दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल के घर पर लगे कैमरे में छेड़छाड़ होने की बात पर दी ये सफाईनॉर्थ दिल्ली के अतिरिक्त डीसीपी हरेंद्र सिंह के मुताबिक, ये बात तथ्यात्मक रूप से गलत और गैरजिम्मेदाराना है कि दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की बात कही है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा है कि कैमरों से छेड़छाड़ हुई है या नहीं पुलिस को ये साबित करना होगा।

 

हरेंद्र सिंह ने आगे कहा कि कोर्ट में यह बात बताई गई है कि ‘पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के टाइमिंग में गड़बड़ी पाई है। कैमरों के साथ छेड़छाड़ हुई है या नहीं यह सिर्फ फॉरेंसिक जांच के बाद ही पता चल सकेगा। कृपया गलत जानकारी के साथ पुलिस को कोट ने करें।’

 

एएनआई के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी हरेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि 19 फरवरी की रात जो बैठक की गई थी वह कैंप ऑफिस की जगह केजरीवाल के आवास के ड्रॉइंग रूम में की गई थी। पुलिस ने कोर्ट को यह भी बताया कि सीसीटीवी के समय में 40-45 मिनट का अंतर है जिससे यह साफ होता है कि सीसीटीवी से छेड़छाड़ हुई है।

पुलिस ने अदालत में बताया कि इसकी जांच फॉरेंसिक लैब में कराई जाएगी। अदालत ने अपना आदेश कल (27 फरवरी) तक के लिए सुरक्षित रख लिया है।

आम आदमी पार्टी (आप) बेशक दिल्ली पुलिस की छापेमारी को सियासी साजिश का हिस्सा बता रही है, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्टाफ की तरफ से सहयोग न मिलने पर उन्हें मुख्यमंत्री आवास जाना पड़ा।

जांच को आगे बढ़ाने के लिए सीसीटीवी फुटेज की दरकार थी। इसकी मांग भी तीन दिन पहले पीडब्ल्यूडी से की गई। लेकिन शुक्रवार को उन्हें फुटेज नहीं मिला। जबकि मीडिया में लीक किए गए फुटेज में छेड़छाड़ की आशंका दिख रही थी। इसी वजह से पुलिस टीम ने छापेमारी की।

पुलिस सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वीके जैन के 164 के बयान से साफ हो गया है कि मुख्य सचिव के साथ रात करीब 12 बजे मारपीट की गई। इस मामले में मुख्य सचिव ने पहले ही मामला दर्ज करा रखा है।

पुलिस को अब जांच आगे बढ़ानी थी। इसके लिए घटनास्थल से जुड़े सबूतों की जरूरत थी। इसमें सबसे अहम सीसीटीवी फुटेज था। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि तीन दिन पहले कैमरा लगाने वाली एजेंसी पीडब्ल्यूडी से मुख्यमंत्री आवास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व डीवीआर मांगी गई थी। लेकिन छापेमारी के पहले तक इसे मुहैया नहीं कराया गया है।

इसकी जगह फुटेज मीडिया में जारी कर दी गई। इससे यह साबित करने की कोशिश की गई कि अंशु प्रकाश की शिकायत झूठी है। सीसीटीवी फुटेज में मुख्य सचिव के मुख्यमंत्री आवास से निकलने का वक्त करीब 11:38 बजे थे, जबकि एमएलसी रिपोर्ट में मुख्य सचिव को चोट लगने की बात मध्य रात्रि 12 बजे के बाद बताई गई है।

सूत्र बताते हैं कि वीके जैन के बयान के बाद फुटेज अहम सबूत हो सकता है। लेकिन इसे पुलिस को नहीं दिया जा रहा था। सीसीटीवी फुटेज हासिल करने के लिए दिल्ली पुलिस को छापा मारना पड़ा। इसमें कोई सियासत नहीं है। वारदात स्थल का मुआयना करना जांच अधिकारी का कर्तव्य भी है और बगैर इसके जांच आगे बढ़ नहीं सकती।

तीन विधायकों की हो सकती है गिरफ्तारी
मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के तीन अन्य विधायकों की गिरफ्तारी संभव है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि वीके जैन के बयान व अंशु प्रकाश की शिकायत के आधार पर पूर्व विधायक नितिन त्यागी व राजेश गुप्ता और विधायक अजय दत्त की भूमिका भी स्पष्ट हो रही है। तीनों पर मुख्य सचिव को धमकी देने की बात सामने आ रही है। पुलिस आगे की कार्रवाई के लिए तीनों विधायकों को गिरफ्तार कर सकती है।

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