जितना छटपटा रहे थे बच्चे, वैसा इलाज नहीं मिला, देखने वालों के निकले आंसू
ग्वालियर. जनकगंज इलाके में गुप्तेश्वर पहाड़ी पर बहने वाले झरने में नहाने के दौरान दो बच्चे फिसल गए और पत्थरों से टकराकर गंभीर घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए जेएएच भिजवाया गया, जहां चंद घंटों में ही उनकी सांसें उखड़ गईं। दोनों घर से बिना बताए नहाने चले गए थे। पुलिस के मुताबिक कपिल पुत्र रमेश शाक्य (12) और विशाल पुत्र अंगद ओझा (13) निवासी गोल पहाड़िया बिजली घर के पास दोनों पहाड़ी झरने पर फिसलकर घायल हो गए। आसपास के लोगों ने देखा और 108 को सूचना दी। अस्पताल में दोनों की मौत हो गई।

जितना छटपटा रहे थे बच्चे, वैसा इलाज नहीं मिला, देखने वालों के निकले आंसू
दोपहर 3.30 बजे जेएएच का ट्रॉमा सेंटर। मैंने (रिपोर्टर) देखा, कपिल शाक्य खून से लथपथ बेड पर पड़ा है और उसके एक बेड को छोड़कर दोस्त विशाल ओझा… जिसकी हालत ज्यादा खराब थी। ऑक्सीजन लगा हुआ था। कपिल की मां और बहन उसके पास थी, लेकिन पुलिस को विशाल का घर ढूंढने में देरी हुई तो उसके परिजन काफी देर से पहुंचे। विशाल के मुंह में ऑक्सीजन नोजल, हाथ में ड्रिप और उसकी छटपटाहट…, मैंने देखा, बार-बार उसका हाथ कभी बिस्तर से नीचे गिर रहा था और कभी वह उसे बदहवासी में मुंह पर मार रहा था। मैंने उसका हाथ फौरन पकड़ लिया, जिससे ड्रिप न हट जाए। पहले से मौजूद जनकगंज थाने के एएसआई रोशनलाल नेगी विशाल को छटपटाता देख किसी स्टाफ को ढूंढ रहे थे। बगल वाले बेड पर कपिल की मां बार-बार कह रही थी कि बेटा, तू जल्द ठीक हो जाएगा। यह देख एसएसआई नेगी नम आंखों से बोल ही पड़े- उस बेचारे विशाल के पास कोई नहीं है, नाराज होकर उन्होंने कहा, ये है सरकारी अस्पताल का हाल, कोई न मरे तो मर जाए। अगर यहां अच्छी तरह इलाज मिल जाता तो बच्चों का यह हाल नहीं होता।
बीमार बेटी का इलाज करा कर लौटी मां ने विशाल को बाहर जाने से रोक दोस्त कपिल को भेजा था घर, दोनों पहुंचे नहाने हुई मौत
विशाल की मां ज्योति बीमार बेटी का इलाज कराकर दोपहर 12 बजे करीब घर लौटी ही थी। घर आते ही उन्हें वहां कपिल मिला। उन्हें लगा कि अब शायद दोनों खेलने निकल जाएंगे तो उन्होंने दोनों को डांट लगाई। कपिल से कहा- चल तू सीधे अपने घर जा। इसके बाद विशाल से कहा क- अब तू कहीं खेलने नहीं जाएगा, घर पर ही रहेगा। डांट के बाद कपिल घर से बाहर की ओर निकल गया। इसके 15 मिनट बाद विशाल यह कहकर घर से निकला कि वह अभी आ रहा है। इसके बाद विशाल व कपिल के घायल होने की खबर आई। ज्योति ने सोचा भी नहीं था कि उसका बेटा 15 मिनट की कहकर निकला लेकिन कभी नहीं लौटेगा।
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हर बार खेलकर लौट आता था,वो आज क्यों नहीं लौटा
विशाल की मां ज्योति और पिता अंगद ओझा पूरे परिवार सहित फूट फूटकर रो रहे थे। ज्योति रो-रोकर कह रही थी कि बुधवार को ही वह गणेश उत्सव के कारण स्कूल नहीं गया। अगर चला जाता तो शायद बच जाता। हर बार खेलकर लौट आता था वो,पता नहीं आज क्यों नहीं लौटा। विशाल के एक छोटा भाई व दो बहनें हैं और पिता अंगद ट्रांसपोर्ट नगर में मजदूरी करते हैं। विशाल गोल पहाड़िया पर सरकारी स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ता था।
बेटा,तू इलाज तो करा ले,जो मांगेगा दिलाऊंगी पक्का: कपिल शाक्य की मां हेमवती जिनका इकलौता बेटा दुनिया छोड़कर चला गया। कपिल के एक बड़ी बहन है जो मां के साथ सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंच गई थी। अस्पताल में दर्द से कराहता कपिल बार बार अपनी सिर की पट्टी बदहवासी में हटा रहा था। मां हेमवती बार बार कह रही थी पट्टी मत हटा, बेटा जो मांगेगा मैं तुझे दिलाऊंगी। कपिल के पिता रमेश मजदूरी करते हैं।
बेटा,तू इलाज तो करा ले,जो मांगेगा दिलाऊंगी पक्का: कपिल शाक्य की मां हेमवती जिनका इकलौता बेटा दुनिया छोड़कर चला गया। कपिल के एक बड़ी बहन है जो मां के साथ सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंच गई थी। अस्पताल में दर्द से कराहता कपिल बार बार अपनी सिर की पट्टी बदहवासी में हटा रहा था। मां हेमवती बार बार कह रही थी पट्टी मत हटा, बेटा जो मांगेगा मैं तुझे दिलाऊंगी। कपिल के पिता रमेश मजदूरी करते हैं।
एएसआई बोले-ट्रॉमा सेंटर में इतना सुस्त इलाज
जनकगंज थाने के एएसआई रोशनलाल नेगी ट्रॉमा सेंटर में 3 बजकर, 30 मिनट पर करीब खुद विशाल का हाथ पकड़े हुएे थे,उसे ऑक्सीजन लगी थी। बार बार दर्द से वह छटपटा रहा था तो एएसआई नेगी भी देख नहीं पाए। विशाल के परिवार को खबर करने में देर हुई तो ट्रॉमा में उसके पास रहने वाला कोई नहीं था। एएसआई नेगी खुद बच्चे के पास अटेंडेंट की तरह खड़े रहे और उनके मुंह से यही निकला कि यहां कोई घायल न मरे तो यहां की अनदेखी से पहले मर जाए,बुरा हाल है वाकई।





