सुनंदा पुष्कर मामले में पुलिस ने थरूर की अग्रिम जमानत के लिए रखा यह तर्क
मालूम हो कि सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने 14 मई, 2018 को थरूर के खिलाफ दहेज हत्या व खुदकुशी के लिए उकसाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने इस चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद थरूर को बतौर आरोपी समन जारी किया था। जस्टिस आरके गाबा के समक्ष दिल्ली पुलिस की ओर से स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी। राहुल मेहरा ने कोर्ट के समक्ष कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद शशि थरूर का अग्रिम जमानत लेना सही नहीं था, उन्हें कोर्ट पर भरोसा करना चाहिए था।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा तो वह हर आदमी जिसे समन जारी होगा, जमानत के लिए ऊपरी अदालत के समक्ष पहुंच जाएगा। थरूर ने कानूनी प्रक्रिया का मजाक बनाया, इसलिए वह इस याचिका का समर्थन करते हैं। हालांकि याची को यह अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए याचिका दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं है।
वहीं थरूर की ओर से हाईकोर्ट पहुंचे उनके वकील विकास पाहवा ने दिल्ली पुलिस के तर्क का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जब चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी पुलिस ने रिमांड ले ली या फिर कोर्ट ने ही आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ऐसी आशंका इस मामले में भी थी, इसलिए अग्रिम जमानत के लिए सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। सत्र अदालत में अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया था। इससे साफ है कि उनके मुव्वकिल को हिरासत में लिए जाने की आशंका थी।





