TDP सांसद पर ED ने कसा शिकंजा, 6 महंगी कारें जब्त, होगी पूछताछ

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने टीडीपी सांसद वाईएस चौधरी से कथित रूप से जुड़ी फेरारी, रेंज रोवर और मर्सिडीज बेंज सहित छह महंगी कारें जब्त की हैं और 5700 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में पूछताछ के लिए उन्हें अगले सप्ताह तलब किया है. अधिकारियों ने शनिवार को जानकारी देते हुए कहा कि उसने यह कार्रवाई सुजाना ग्रुप के हैदराबाद और दिल्ली स्थित आठ परिसरों में शुक्रवार को छापेमारी के बाद धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की.

सुजाना समूह की कंपनियों से जुड़ा है राज्यसभा सदस्य चौधरी का नाम
निदेशालय ने कहा कि तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के वर्तमान राज्यसभा सदस्य चौधरी वह व्यक्ति हैं जो सुजाना समूह की कंपनियों के पीछे हैं और उसने इस बारे में साक्ष्य एकत्रित किये हैं कि “सुजाना समूह की विभिन्न कंपनियों के सभी निदेशकों ने उनके निर्देशन में कार्य करते हैं.” एजेंसी ने कहा कि जो महंगी कारें जब्त की गई हैं वे छद्म कंपनियों के नाम से पंजीकृत हैं. टीडीपी सांसद को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडूका नजदीकी माना जाता है. चौधरी को 27 नवम्बर को मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया है. बता दें कि नायडू के इस वर्ष के शुरू में एनडीए छोड़ने से पहले चौधरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री थे. 

चौधरी की अध्यक्षता में काम कर रही हैं ये कंपनियां
निदेशालय ने कहा कि उसने चेन्नई स्थित कंपनी मेसर्स बेस्ट एंड क्रॉम्प्टन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (बीसीईपीएल) के बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में कंपनी (सुजाना समूह) में छापेमारी की. उसने कहा कि चेन्नई स्थित कंपनी के खिलाफ छापेमारी में सुजाना समूह से जुड़ी कथित मुखौटा कंपनियों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. निदेशालय ने एक बयान में कहा, “जब्त दस्तावेजों या रिकार्ड से इसकी पुष्टि हुई कि बीसीईपीएल ने सुजाना समूह की अन्य कंपनियों के साथ वाईएस चौधरी की अध्यक्षता में कार्य कर रही थीं जो कि टीडीपी के वर्तमान राज्यसभा सदस्य हैं.” 

इसमें कहा गया है, “जांच में इसका खुलासा हुआ कि सुजाना समूह की विभिन्न कंपनियों के सभी निदेशक चौधरी के निर्देशन में कार्य करते हैं जो कि बीसीईपीएल के निदेशकों के व्यापारिक/ आवासीय परिसरों से प्राप्त ईमेल पत्राचार और संचार से प्रमाणित होता है.” निदेशालय ने कहा कि इन आरोपों के प्रकाश में एजेंसी ने सुजाना समूह के आठ परिसरों पर शुक्रवार को छापे मारे जिससे “खुलासा हुआ कि समूह की कंपनियों द्वारा बैंकों से 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई.” 

कुछ ऋण सांसद की निजी गारंटी पर मंजूर हुए
एजेंसी ने कहा कि दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि समूह 120 से अधिक कंपनियों का नियंत्रण कर रहा था और उनमें से अधिकतर चल नहीं रही थीं या उनका अस्तित्व केवल कागजों पर था. एजेंसी ने कहा कि प्रारंभिक बयानों से संकेत मिलता है कि समूह की कंपनियों को कुछ ऋण चौधरी की निजी गारंटी पर मंजूर किये गए.

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