सू की ने पत्रकारों को जेल भेजने के अदालती फैसले का किया बचाव

म्यांमार की नेता आंग सान सू की ने रोहिंग्या संकट पर रिपोर्टिंग करने वाले दो पत्रकारों को जेल भेजे जाने के कोर्ट के फैसले का बचाव किया है. गौरतलब है कि इन दोनों पत्रकारों पर चलाए गए मुकदमे को स्वतंत्र प्रेस को चुप कराने की कोशिश के तौर पर देखा गया और वैश्विक स्तर पर इस कदम की आलोचना की गई. दोनों ही पत्रकार न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के संवाददाता है.

सू की ने स्वीकार किया कि मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर निर्मम कार्रवाई से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता था. हालांकि, उन्होंने कहा कि दोनों पत्रकारों के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया गया.  

सू की ने कहा कि उन लोगों (संवाददाताओं) को इसलिए नहीं जेल में डाला गया कि वे पत्रकार हैं, बल्कि अदालत ने फैसला किया कि उन्होंने सरकारी गोपनीयता कानून को तोड़ा था.

वा लोन (32) और क्याव सोई ओ (28) को पिछले साल सात -सात साल कैद की सजा सुनाई गई. दरअसल, इन दोनों ने रखिन प्रांत में सैन्य कार्रवाई के दौरान ज्यादतियों की रिपोर्टिंग की थी.  

उन्होंने विश्व आर्थिक मंच में एक चर्चा के दौरान कहा कि यह मामला एक खुली अदालत में चला. मुझे नहीं लगता कि किसी ने जज के फैसले को पढ़ने की कोशिश भी की. उन्होंने कहा कि इन दोनों को अब भी अपील करने का अधिकार है.  

रोहिंग्या मुस्लिमों द्वारा सुरक्षाबलों पर अगस्त 2017 में हुए हमलों के बाद से सेना की कार्रवाई में कथित तौर पर किए गए अत्याचारों को लेकर म्यांमार अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है. सेना पर बड़े पैमाने पर बलात्कार और हत्याएं करने और हजारों घरों को आग के हवाले करने का आरोप है.

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सू की ने कहा कि इलाके में बड़ी संख्या में मौजूद जातीय अल्पसंख्यकों ने स्थिति जटिल बना दी थी. अल्पसंख्यकों में कुछ के पूरी तरह विलुप्त होने का खतरा है और वे केवल मुस्लिम और रखाइन बौद्ध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि म्यामांर उन लोगों को वापस बुलाने को तैयार हैं जो भागकर गए थे लेकिन उनकी वापसी की प्रकिया जटिल है क्योंकि इसमें दो सरकारें शामिल हैं.

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