राज्य सरकार ने माना 69,000 शिक्षक भर्ती की चयन सूची में विसंगतियां

यूपी सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में यह स्वीकार किया कि सहायक शिक्षक भर्ती-2019 की चयन सूची में विसंगतियां हैं। सरकार ने कोर्ट से यह भी कहा कि विसंगतियों को लेकर एनआइसी से जवाब मांगा गया है। एनआईसी का जवाब मिलने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार की तरफ से यह भी पक्ष रखा गया कि 31277 पदों पर भर्तियों का सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन एसएलपी में पारित आदेश के तहत पुनरावलोकन किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद कहा कि याची पंकज यादव की याचिका पर कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। याचिका में कहा गया था कि बेसिक शिक्षक भर्ती-2019 में याची से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया पर अधिक अंक होते के बाद भी उसका नाम घोषित की गई चयन सूची में नहीं है और न उसे काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया।


याची के अधिवक्ता ने ये दी थी दलील
याची के अधिवक्ता की दलील थी कि अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में याची के क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स 71.1 फीसदी हैं पर उसे काउंसिलिंग के लिए नहीं बुलाया गया। इसके विपरीत 68.78 फीसदी नंबर हासिल करने वालों को बुलाया गया, जो कि सही नहीं है

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इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रणविजय सिंह ने कहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का कोई सवाल ही नहीं उठता और अगर कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारा जाएगा।
यह है पूरा मामला
प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69,000 शिक्षक भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया जारी है। जून माह में 67867 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई थी परंतु काउंसिलिंग के पहले दिन ही हाई कोर्ट ने चयन पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद राज्य सरकार ने 21 मई के शीर्ष कोर्ट के आदेश पर 31661 पदों पर चयनितों की नई सूची जून माह में जारी सूची से ही बनाए जाने के आदेश दिए थे जिसके बाद बेसिक शिक्षा परिषद ने 31277 पदों पर अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन कर उनको जिलों में भेज दिया।

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