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कुछ यूँ की पांच साल की बच्ची से द‍रिंदगी, यूं झेली मासूम ने पीड़ा

रोहतक। यहां एक बच्‍ची के साथ एक दरिंदे ने ऐसी हैवानियत को जिसकी दास्‍तां सुनकर रूह कांप जाती है। एक साल तक वह मौत से लड़ती रही और तीन ऑपेरशन के बाद उसे माैत के मुंह से निकाला जा सका। बच्ची को स्कूल में दाखिला लिए हुए अभी दस दिन ही बीते थे कि वह गांव के ही एक दरिंदे के हत्‍थे चढ़ गई।

तीन दिन तक नहीं आया होश, तीन ऑपरेशन के बाद बची जान

बच्‍ची रोज की तरह ही वह उस दिन भी स्कूल से छुट्टी होने के बाद घर के लिए निकली थी, लेकिन घर नहीं पहुंची। मां को चिंता हुई तो वह खोजने निकली। शिक्षिका से लेकर हेडमास्टर तक और घर से लेकर गांव की हर गली तक बच्ची को ढूंढा, लेकिन नहीं मिली। काफी देर बाद भिवानी से आने वाला एक व्यक्ति बच्ची को लेकर गांव में पहुंचा। बच्ची बेहोश थी। शरीर खून से लथपथ था। कपड़े खराब हो गए थे। देखने वालों का दिल दहल गया था।

घटना के बाद से बच्ची को तीन दिन तक होश नहीं आया था। आखिरकार एक साल के भीतर तीन बड़े ऑपरेशन करने के बाद डाक्टरों ने बच्ची को मौत के मुंह से निकाला था। एक ओर जहां बच्ची ने शारीरिक और मानसिक यातना ङोली, वहीं परिजनों को सामाजिक संवेदनहीनता का शिकार होना पड़ा था। पुलिस की सक्रियता से आरोपित पकड़ा गया था और अभी जेल में है। मामला कोर्ट में है।

मां की इच्छा है कि उसकी फूल सी बेटी ने जो कष्ट झेले हैं, आरोपित को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए। परिजनों ने बताया कि पीड़िता का शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद घटना के तीन महीने के बाद ही दूसरा ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद भी उसका एक और आॅपेरशन हुआ। तीन ऑपरेशन के बाद ही बच्ची की जान किसी तरह से बच पाई थी।

गांव के हर युवक की खंगाली कुंडली

आरोपित को पकड़ने के लिए पुलिस ने हर एक युवक की कुंडली खंगाली थी। इसके लिए खुद महिला थाना की एसएचओ इंस्पेक्टर गरिमा ने मामले की जांच शुरू की थी। गांव से गायब होने वाले युवकों की तहकीकात करते हुए ही आरोपित के बारे में पता चला था।

चाइल्ड हेल्प लाइन ने भी निभाई थी अहम भूमिका

चाइल्ड हेल्प लाइन और चाइल्ड केयर यूनिट ने भी इस मामले में अहम भूमिका निभाई थी। बाल संरक्षण अधिकारी पूनम ने बताया था कि उन्होंने काउंसिलिंग के माध्यम से बच्ची को सामान्य करने की कोशिश की थी। जिसमें वह कामयाब हुईं।

डाक्टर बनना चाहती है मासूम 

मामले की जांच के दौरान पीड़िता का लगाव जांच अधिकारी गरिमा से हो गया। बच्ची को वह घटना भुलाने और आरोपित को पकड़ने में कामयाब रही इंस्पेक्टर गरिमा से इस कदर लगाव है कि पीड़िता से कोई शरारत भी करता है तो वह कहती है कि पुलिस मैम को बता देगी। वह उसकी पिटाई करेंगी। पीड़िता की मां ने बताया कि वह डाक्टर बनना चाहती है।

आरोपित को अभी तक सजा नहीं

आरोपित के भाई ने पीड़िता की मां से कहा कि वह अपने भाई को छुड़ा लेगा, चाहे जैसे। इसके लिए उसे नाबालिग भी साबित करने की कोशिश हुई। हाई कोर्ट में इसके लिए अपील भी डाली गई, लेकिन खारिज कर दी गई। साथ ही, जमानत के लिए भी अर्जी लगाई गई थी लेकिन कोर्ट ने वह भी नामंजूर कर दी। अब हाई कोर्ट और निचली अदालत के बीच में फैसला लटका हुआ है। आरोपित को अभी तक सजा नहीं हुई है।

बैठते ही आने लगता था ब्लड

जब बच्ची का इलाज चल रहा था तो वह जैसे ही उठकर बैठती थी तो उसके शरीर से ब्लड बाहर आने लगता था। घाव इस कदर गहरा था कि बच्‍ची का इलाज करीब एक साल तक चला। सामान्य होने में ही कई दिन लग गए। अब मां ने दूसरे स्कूल में दाखिला करवा दिया। अब बेटी बस से एक निजी स्कूल में आती जाती है।

परिवार ने झेली पीड़ा, सुनने वाला नहीं कोई

बच्ची की मां ने बताया कि बच्ची को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गए थे तो डाक्टरों ने पीजीआइ रेफर कर दिया। वे बच्‍ची को लेकर पीजीआइ पहुंचे। कानूनी मामला कहकर डाक्टर ने एमएलआर मांगी और बिना इसके बच्ची को भर्ती ही नहीं किया। परिजन रोए, डाक्टरों के सामने गिड़गिड़ाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वह सिविल अस्पताल पहुंचे। पुलिस की जांच के साथ ही बच्ची का इलाज शुरू हुआ। कोर्ट में भी वकील ने सुनवाई के दौरान ऐसे सवाल पूछे कि रूह कांप गई।

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