तो इसलिए किया जाता है हज, ये हैं मान्यताएं

इस्लाम मानने वालों के लिए हज पर जाना किसी सपने के पूरे होने जैसा होता है. हर मुसलमान जिंदगी में एक बार हज जरूर जाना चाहता है. कई लोग हज पर जाने के लिए जिंदगी भर की अपनी कमाई से पैसे काट-काट जमा करते हैं. इस साल भी हज के मौके पर हिंदुस्तान के साथ दुनिया भर से लाखों मुसलमान मक्का पहुंच रहे हैं.तो इसलिए किया जाता है हज, ये हैं मान्यताएं

ऐसे में जानते हैं हज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

इस्लाम धर्म को मानने के लिए पांच चीज़ें फर्ज़ करार दी गई हैं. इन्हीं के आधार पर इस धर्म की रूपरेखा तैयार होती है. हज पर जाने के लिए अलावा चार दूसरे फर्ज़ हैं.

तौहीद या शहादा: इसका अर्थ है सिर्फ ‘अल्लाह’ पर विश्वास करना और यह यह भी विश्वास करना कि अल्लाह एक है और मुहम्मद साहब अल्लाह के भेजे गए पैगंबर हैं.

नमाज: दिन में पांच वक्त नमाज पढ़ना मुसलमानों के लिए अनिवार्य है.

रोजा: रमजान के महीने में सूरज निकलने से सूरज डूबने तक बिना खाए-पिए रहना.

जकात: कुरान के अनुसार, हर मुसलमान को अपनी सालाना आय का 2.5% गरीबों को दान कर देना चाहिए. इसी दान को जकात कहा जाता है.

हज पर कौन जा सकता है?

हज पर जाने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है. कोई भी हज पर जा सकता है, चाहे वह बच्चा हो, बूढ़ा हो या जवान. लेकिन भारत से बच्चे और औरतें बिना मेहरम यानी गार्जियन के बिना हज पर नहीं जा पाते थे. हालांकि अब औरतों को बिना मेहरम भी हज पर जाने के नियम बन गए हैं. भारत में भी पहली बार औरतें बिना मेहरम के हज जा रही हैं. कुल 1308 औरतें इस बार बिना मेहरम के हज करने गई हैं. इस हफ्ते मुस्लिमों के सबसे बड़ी वार्षिक तीर्थयात्रा हज की शुरुआत मक्का शहर में होनी है. दुनिया में किसी भी दूसरी जगह एक साथ इकट्ठा होने वाले लोगों से कहीं ज्यादा लोग यहां पर इकट्ठा होते हैं. रविवार 19 अगस्त से शुक्रवार 24 अगस्त तक यह तीर्थयात्रा चलेगी.

क्या है हज के पीछे की कहानी?

कुरान के अनुसार, हज की कहानी अब्राहम से शुरू होती है, जिन्हें अल्लाह की तरफ से अपनी पत्नी हाजरा और बेटे इस्माइल को प्राचीन मक्का के रेगिस्तान में छोड़ने का आदेश मिला था. क्योंकि अल्लाह उनके विश्वास की परीक्षा लेना चाहते थे. जब अब्राहम ने अल्लाह का कहा मान लिया और हाजरा और इस्माइल को छोड़ दिया तो प्यासे बच्चे के लिए हाजरा ने पानी की तलाश में मक्का की सफा और मरवाह की पहाड़ियों के बीच सात चक्कर लगाए.

लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला. इसी दौरान प्यास से तड़पते बच्चे के पैर के थाप से वहां ताजे पानी के चश्मा (सोता) निकल आया. उसी पानी को आबे ज़मज़म के नाम से जाना जाता है, जिसे मुस्लिम काफी पवित्र मानते हैं. अब्राहम ने आगे चलकर वहीं पास की जगह पर काबा का निर्माण किया. काले पत्थर की एक छोटी सी इमारत जो कि बड़ी सी मस्जिद के केंद्र में है. जिसका हाजरीन घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में सात बार चक्कर लगाते हैं. इस दौरान वे लगातार अपने मन में अल्लाह पर विश्वास की बात बनाए रखते हैं. इस प्रक्रिया को ‘तवाफ’ कहा जाता है.

काबा के चारों ओर चक्कर लगाने के अलावा हाजी हजरत अब्राहम के स्थान पर दो रक्कत नमाज़ भी अता करते हैं. वे सफा और मारवाह पहाड़ियों के बीच में हाजरा की पानी की खोज में जैसे भटकी वैसे घूमते हैं. फिर आबे जमजम पीते हैं. अराफात की पहाड़ी और मुज़दालिफा के मैदान पर रात में प्रार्थना करते हैं और शैतान का प्रतीक माने जाने वाले तीन खंभों पर पत्थर मारते हैं. ताकि वे शैतान को दिखा सकें कि वे उससे डरते नहीं हैं.

क्यों मनाई जाती है बकरीद?

धू-अल-हिजाह जो इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना होता है, उसके आठवें दिन हज शुरू होकर तेरहवें दिन खत्म होता है. ग्रेगोरियन यानी हमारे अंग्रेजी के कैलेंडर के हिसाब से यह तारीख हर साल बदलती रहती है, क्योंकि चांद पर आधारित इस्लामिक कैलेंडर, अंग्रेजी कैलेंडर से 11 दिन छोटा होता है.

ईद-उल-अजहा यानी बकरीद जो इस इस्लामिक महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है. यह अब्राहम के अल्लाह के प्रति इस्माइल की कुर्बानी को दिखाता है. यह अल्लाह में सबसे ज्यादा विश्वास दिखाने का एक तरीका था. जिसे दैवीय शक्ति के जरिये उसे अपने बेटे की बलि देने के बजाए एक दुंबा (भेड़ जैसी ही एक प्रजाति) मिल गई थी, कुर्बान करने के लिए. आज इसी कहानी के आधार पर जानवर की कुर्बानी दी जाती है. इसे तीन भागों में काटा जाता है. एक भाग गरीबों में दान कर दिया जाता है. दूसरा भाग दोस्तों और रिश्तेदारों को दे दिया जाता है. और बचा हुआ तीसरा भाग परिवार खाता है.

भारत से दो तरह से जा सकते हैं हज

हज पर कितने लोग जायेंगे यह सऊदी अरब ही तय करता है. हर देश के लिए सऊदी अरब लोगों का अलग-अलग कोटा तय करता है. वैसे हज पर जाने के दो रास्ते होते हैं. पहला रास्ता होता है सरकारी कोटे का. और दूसरा होता है प्राइवेट. साल 2017 में भारत से 1,70, 025 लोगों को हज पर जाने की परमिशन मिली थी. जिनमें से 1,25,025 लोग सरकारी थे. और बाकी के 45,000 लोग प्राइवेट कोटे से ट्रेवल एजेंट की मदद से हज पर गये थे. आजादी के बाद पहली बार भारत से रिकॉर्ड 1 लाख 75 हजार 25 मुसलमान हज 2018 के लिए जायेंगे. इस वर्ष हज पर जाने वालों में रिकॉर्ड 47 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं.

क्या हज सुरक्षित है?

यूं तो सारी प्रक्रिया का अगर आप पालन कर रहे हैं तो हज सुरक्षित ही है. लेकिन चूंकि इतनी बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचते हैं को कई बार कुछ दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं. ये दुर्घटनाएं कई बार शैतान को पत्थर मारने के दौरान होती हैं. मीना शहर में ही वे तीन दीवारें हैं जिन्हें शैतान का प्रतीक माना जाता है. और हज के दौरान मुस्लिम श्रृद्धालु उस पर कंकड़ी मारकर दिखाते हैं कि वे उससे डरने वाले नहीं हैं. सबसे ज्यादा लोग 1990 में हुए एक हादसे में मारे गए थे. इसमें कुल मरने वालों की संख्या 1426 थी.

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